नंदी विराजेंगे विशाल मंडप में, देवबलोदा मंदिर का सौंदर्यीकरण जारी

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देवबलोदा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण एवं उन्नयन का कार्य तेज़ी से जारी है

भिलाई। छत्तीसगढ़ की समृद्ध पुरातात्विक धरोहरों में शामिल देवबलोदा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के संरक्षण एवं उन्नयन का कार्य तेज़ी से जारी है। मंदिर परिसर के ऐतिहासिक कुंड की सफाई का कार्य पूरा हो चुका है। इसके अलावा, मंदिर के ठीक सामने स्थित नंदी के जर्जर मंडप को हटाकर अब वहां राजस्थानी बलुआ पत्थरों से खूबसूरत नक्काशी युक्त नया मंडप तैयार किया जा रहा है, जो आकार लेते ही दर्शकों को आकर्षित करने लगा है।
सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र, राष्ट्रीय संस्कृति कोश और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संयुक्त सहयोग से यह कार्य किया जा रहा है, जिसके तहत मंदिर और उसके परिसर का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है। पुराना नंदी मंडप जर्जर होने के कारण खतरा बन गया था और उसे कोरोना काल से ही रस्सियों से घेर दिया गया था। अब नए मंडप का निर्माण सावधानीपूर्वक किया जा रहा है।
पुराने पत्थरों को निकाला गया मंदिर के चारो ओर गलियारा, मंदिर तक मेनगेट से पहुंचने वाला मार्ग एवं कुंड के चारो ओर लगे पुराने टूट फूट चुके पत्थरों को हटाया जा रहा है। इनके स्थान पर नए पत्थरों को लगाया जाएगा। इसी तरह से नंदी को छांव देने बनाया गया कांक्रीट का स्ट्रक्चर भी जर्जर हो गया है। उसे भी नया बनाया जाएगा। नंदी की प्रतिमा में आई दरारों को पूरी तरह भरा जाएगा। वर्तमान में निर्माण कार्यों की वजह से गार्डन को नुकसान न हो इसके लिए जाली भी लगा दी गई है।
मंदिर का यह है महत्व
रायपुर दुर्ग के बीच फोरलेन से करीब पांच किलोमीटर दूर देवबलोदा गांव स्थित है। इस मंदिर का शिखर नहीं है। मंदिर में मंडप एवं गर्भगृह बनाया गया है। मंदिर के बगल में स्थित कुंड में हमेशा पानी भरा रहता है। मदिर का निर्माण बलुआ पत्थरों से किया गया है। इसकी दीवारों पर देवी देवताओं, जनजीवन, युद्ध कला, संस्कृति से संबंधित मूर्तियां उकेरी गई थीं। कई स्थानों पर यह कलाकृतियां टूट गई है। मंदिर के सामने की ओर नंदी की प्रतिमा स्थापित है, इसमें भी दरार आ गई हैं।

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