सम्मिलित चारागाह भूमि में प्लांट लगाने का ग्रामीणों ने किया विरोध, मांग पूरी नहीं होने पर संवैधानिक तरीके से आंदोलन की चेतावनी
भिलाई, मोहंदी ग्राम खेरधा की सम्मिलित चारागाह भूमि में प्रस्तावित बायो सीएनजी गैस प्लांट के विरोध में ग्राम मोहंदी में महापंचायत का आयोजन किया गया। महापंचायत में आसपास के आठ गांव खेरधा, मोहंदी, नारधा, रिंगनी, मुड़पार, ओखरा, चेटूआ और खेदामारा से पांच हजार से अधिक ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने एक स्वर में प्रस्तावित प्लांट का विरोध करते हुए शासन-प्रशासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की।
महापंचायत में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष अमित बघेल विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन को संविधान एवं कानून के दायरे में रहकर कार्य करना चाहिए। उन्होंने ग्रामीणों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करने की चेतावनी भी दी।

ग्रामसभा की अनुमति के बिना भूमि आवंटन का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत खेरधा की सम्मिलित चारागाह भूमि, जिसे पूर्वजों द्वारा दान किया गया था और राजस्व अभिलेखों में सम्मिलित चारागाह के रूप में दर्ज है, में ग्रामसभा की अनुमति के बिना बायो सीएनजी गैस प्लांट के लिए सात एकड़ भूमि 25 वर्ष की लीज पर देने का आदेश जारी किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम पंचायत की ओर से आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद भूमि आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 5 जून 2026 को अहिवारा तहसील में दावा-आपत्ति की तारीख निर्धारित थी। इसी दिन अहिवारा तहसीलदार, एसडीएम भिलाई-3 और भूमि आवंटन अधिकारी द्वारा प्लांट के लिए अनुशंसा की गई। इसके बाद उसी दिन शाम पांच बजे जिला समिति की बैठक आयोजित कर रात में ही भूमि आवंटन का आदेश जारी कर दिया गया। ग्रामीणों ने इसे प्रक्रिया एवं नियमों के विपरीत बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

33 एकड़ में कचरा डंप यार्ड के प्रस्ताव पर भी सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि इसी क्षेत्र में 33 एकड़ भूमि पर कचरा डंप यार्ड बनाए जाने से संबंधित एक अन्य प्रकरण भी शासन की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है, जिसकी प्रक्रिया अभी लंबित है। ग्रामीणों का कहना है कि एक ही क्षेत्र में कचरा प्रबंधन से संबंधित अलग-अलग परियोजनाओं के प्रस्ताव से आसपास के गांवों पर पर्यावरणीय प्रभाव पड़ने की आशंका है।
चारागाह और पर्यावरण को नुकसान की आशंका
महापंचायत में ग्रामीणों ने कहा कि उक्त भूमि पर ग्रामीणों और पशुधन का निर्भरता है। यदि यहां बायो सीएनजी प्लांट स्थापित किया जाता है और शहर का गीला कचरा लाकर उसका प्रसंस्करण किया जाता है, तो आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने, पशुओं के चरागाह की समस्या उत्पन्न होने और भविष्य में भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की चिंता जताई।
ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि कचरा आधारित गतिविधियों से क्षेत्र में दुर्गंध, प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। हालांकि, इन स्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जनप्रतिनिधियों और संगठनों ने भी जताया विरोध
महापंचायत में अमित बघेल के साथ छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के पदाधिकारी एवं सेनानी भी मौजूद रहे। इसके अलावा आसपास के गांवों के सरपंच, उपसरपंच, पंच और अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपनी बात रखी। वक्ताओं ने ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए प्रस्तावित बायो सीएनजी प्लांट का विरोध किया।
ग्रामीणों ने कहा कि मांगों का निराकरण नहीं होने पर शासन-प्रशासन के खिलाफ लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। महापंचायत में उपस्थित ग्रामीणों ने प्लांट की स्थापना के विरोध में एकजुट रहने का संकल्प भी लिया।
कई बार ज्ञापन देने के बाद भी सुनवाई नहीं होने का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार, बायो गैस प्लांट की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से ही विभिन्न माध्यमों से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा कई बार ज्ञापन भी सौंपे गए हैं, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक जिला प्रशासन की ओर से उनकी आपत्तियों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल को जिला कलेक्टर से मुलाकात का समय नहीं दिया गया।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से पूरे मामले में ग्रामीणों की आपत्तियों और ग्रामसभा की भूमिका को ध्यान में रखते हुए भूमि आवंटन एवं प्रस्तावित प्लांट की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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