प्रेम ही जीवन है, इंसानियत और अपनत्व से ही संवरता है जीवन – अमन रंगेला

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सच्चे लगाव में खुशियां बांटने, आंसुओं को अपनाने और रिश्तों को प्रेम से सींचने का संदेश देते हैं अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि-व्यंग्यकार अमन रंगेला ‘अमन सनातनी’

सावनेर, नागपुर, जीवन में प्रेम, अपनत्व और मानवीय संवेदनाओं का महत्व धन-दौलत और बाहरी पहचान से कहीं अधिक है। सच्चा प्रेम केवल खुशियों में साथ निभाने का नाम नहीं, बल्कि किसी के दुख और आंसुओं को भी अपनेपन के साथ स्वीकार करने की भावना है। इसी मानवीय संवेदना को अपनी रचना ‘प्रेम ही जीवन है’ के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि-व्यंग्यकार अमन रंगेला ‘अमन सनातनी’ ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

अंतर्राष्ट्रीय हास्य कवि-व्यंग्यकार अमन रंगेला ‘अमन सनातनी’, सावनेर, नागपुर (महाराष्ट्र) की यह रचना प्रेम को केवल व्यक्तिगत भावना नहीं, बल्कि बेहतर समाज के निर्माण की आधारशिला के रूप में प्रस्तुत करती है। कविता पाठकों को यह संदेश देती है कि जीवन की वास्तविक समृद्धि दूसरों के चेहरे पर मुस्कान लाने, दुख में साथ देने और रिश्तों को प्रेम से निभाने में है।

“प्रेम ही जीवन है”

जब कभी छू जाएं तुम्हें दो कोमल नज़रें,
तब उन नज़रों में कभी नशा मत खोजना ।
हो सके तो सजा दो उनके हर ख्वाबों को,
मिटा दो जिंदगी से गम के सारे बादल ।

यदि सच्चा लगाव है तो समझो उसका अर्थ भी,
आंसूओं को भी पलकों संग अपनाना सीखो ।
इस संसार की नींव रखी है लगाव की डोर पर,
इसलिए लगाव की ज्योति हर दिशा में फैलाओ ।

नफरत की आग में रिश्ते राख हो जाते हैं,
कड़वे शब्दों से दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाते हैं ।
देना चाहो तो चेहरे पर मुस्कान दे दो किसी को,
लेना चाहो तो दिल से दुआओं का खजाना ले लो ।

धन-दौलत से ऊंचा होता है अपनापन,
नाम से बड़ी होती है किरदार की पहचान ।
जहां प्रेम की नदी बहती है निर्मल धारा,
वहीं पर बसता है साक्षात भगवान ।

रूठे हुए दिल को शब्दों से मना लेना,
टूटे हुए बंधन को भावों से सजा लेना ।
क्योंकि धरती पर सबसे बड़ा कोई धर्म है,
तो वो है इंसान का इंसान से प्रेम है ।
अमन रंगेला अमन सनातनी

अमन रंगेला अमन सनातनी

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