होली जैसे त्यौहारों के कारण ही आज एक है भारत- पं. प्रभुनाथ मिश्र
साहित्य सृजन परिषद भिलाई की ओर से होली मिलन और सरस काव्य गोष्ठी संपन्न
भिलाई, साहित्य सृजन परिषद् भिलाई की ओर से होली मिलन समारोह एवं सरस काव्य गोष्ठी का आयोजन राज राजेश्वरी मन्दिर पावर हाउस में किया गया। इस दौरान मुख्य अतिथि आचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने कहा कि केवल तुकबंदी करना कविता नहीं है। ये रचनात्मक साहित्य साधना है। उन्होंने कहा कि त्यौहारों का देश है, होली जैसे उत्सव सबको जोड़ते हैं और कविता और त्योहारों से भारत विश्व विख्यात रहा है। समारोह की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ श्रमिक नेता पं. प्रभुनाथ मिश्र ने कहा कि साहित्य सबको जोड़ता है। होली जैसे त्योहारों, तीर्थों और पर्वों के कारण ही भारत आज एक है।
इस दौरान सुशील यादव, डॉ. नलिनी श्रीवास्तव, डॉ. नीलकंठ देवांगन, शुचि “भवि”, इस्माइल आजाद, डॉ. वीना सिंह “रागी”, प्रकाश चन्द्र मंडल, रामायण मिश्र, नीलम जायसवाल, डॉ. संजय दानी, सुमित्रा “शिशिर”, टी एन कुशवाहा “अंजन”,डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी “सब़”, प्रदीप श्रीवास्तव, एन एल मौर्य “प्रीतम”, सुशील यादव, ओम वीर करन, सतीश कुमार त्रिपाठी, बुध्द सेन शर्मा, राकेश गुप्ता “रूसिया”, टी आर कोरिया “अलकरहा”, नीता कम्बोज “शीरी ” , विजय कुमार, कलावती देवी, ओशिन कम्बोज, शिल्पी दास, शंकर लाल देवांगन, बैकुंठ महानंद, पुरानिक लाल चेलक, डामन लाल वर्मा, सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यार्थी”, डॉ. नरेन्द्र कुमार देवांगन, मुकेश भट्टनागर, रविशंकर मिश्रा, अर्जुन वर्मा और सोनिया सोनी सभी कवियों ने होली मिलन समारोह में इन्द धनुषी रंगों से सबको सराबोर कर दिया। साहित्य सृजन परिषद् के उपाध्यक्ष पद पर सर्वसम्मति से टी आर कोरिया “अलकरहा”को उपाध्यक्ष चुना गया। संचालन नीता कम्बोज “शीरी”ने किया और आभार प्रदर्शन ओमवीर करन ने किया। अंत में दिवंगत साहित्यकारों को श्रद्धांजलि दी गई। जिनमेें यशोदा देवी नीलम जायसवाल की माताश्री, कवि सुशील भोले और हजलकार राम बरन कोरी “कशिश” की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट मौन रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।


