केंद्रीय जेल दुर्ग में मां दुर्गा की स्थापना, 362 बंदियों ने रखा उपवास

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नवरात्रि पर जेल परिसर में प्रज्वलित किए गए ज्योति कलश

दुर्ग, शारदीय नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल दुर्ग में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मां दुर्गा की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान जेल परिसर में ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए तथा जोत-जवारा स्थापित कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। नवरात्रि के दौरान भक्ति गीतों और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से जेल परिसर में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया गया। इस अवसर पर कुल 362 बंदियों ने उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना में सहभागिता की।

जेल प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवरात्रि पर्व के दौरान उपवास रखने वाले बंदियों में 332 पुरुष बंदी और 30 महिला बंदिनी शामिल रहीं। इनमें से 223 बंदियों ने तीन दिन का उपवास रखा, जबकि 109 बंदियों ने पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर अपनी श्रद्धा और आस्था प्रकट की। बंदियों ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर मां दुर्गा से सुख, शांति और सद्बुद्धि की कामना की।

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नवरात्रि पर जेल परिसर में प्रज्वलित किए गए ज्योति कलशदुर्ग, शारदीय नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर केंद्रीय जेल दुर्ग में श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मां दुर्गा की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान जेल परिसर में ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए तथा जोत-जवारा स्थापित कर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। नवरात्रि के दौरान भक्ति गीतों और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से जेल परिसर में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया गया। इस अवसर पर कुल 362 बंदियों ने उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना में सहभागिता की।भक्ति और साधना से आध्यात्मिक वातावरणआत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव पर जोरसुधार और पुनर्वास की भावना को बढ़ावा

भक्ति और साधना से आध्यात्मिक वातावरण

नवरात्रि के दौरान केंद्रीय जेल परिसर में मां दुर्गा की स्थापना के साथ ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए और जोत-जवारा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक कार्यक्रमों और भक्ति गीतों के माध्यम से बंदियों को आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर मिला। पर्व के दौरान बंदियों ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना कर धार्मिक आस्था का परिचय दिया।

आत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव पर जोर

जेल प्रशासन द्वारा धार्मिक आयोजनों के माध्यम से बंदियों को आत्मचिंतन, संयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही नैतिक मूल्यों को जीवन में आत्मसात करने तथा बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया गया। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य बंदियों में सद्भावना, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण विकसित करना है, ताकि वे अपने जीवन में सुधार की दिशा में प्रयास कर सकें।

सुधार और पुनर्वास की भावना को बढ़ावा

केंद्रीय जेल दुर्ग प्रशासन द्वारा बंदियों के मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास, आत्मशुद्धि तथा सुधार और पुनर्वास की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर धार्मिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। जेल प्रशासन का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम बंदियों को अपनी गलतियों पर आत्मचिंतन करने, अनुशासित जीवन अपनाने और समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करने में सहायक होते हैं।

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शारदीय नवरात्रि के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के माध्यम से बंदियों को आस्था, संयम और सद्भावना के साथ जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संदेश दिया गया।

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