छत्तीसगढ़ के युवा विदेश में हिंदी के अवसर तलाशें, संभावनाओं की कमी नहीं : मयंक

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कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय और हिंदी-यूएसए समिति की ओर से ‘’हिंदी भाषा-एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य’’ पर हुई एक दिवसीय संगोष्ठी

भिलाई। कल्याण स्नातकोत्तर महाविद्यालय भिलाई और हिंदी-यूएसए समिति की ओर से ‘’हिंदी भाषा-एक वैश्विक परिप्रेक्ष्य’’ पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन शनिवार 29 नवंबर को महाविद्यालय के हिंदी डिजिटल कक्ष में किया गया। जिसमें अमेरिका में रह रहे भिलाई मूल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर और हिंदी सेवी मयंक जैन ने हिंदी व पत्रकारिता के विद्यार्थियों-शोधार्थियों से संवाद किया।

छात्रसंघ प्रभारी डॉ. मणिमेखला शुक्ल की सरस्वती वंदना से इस संगोष्ठी की शुरुआत हुई। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के तौर पर उपस्थित मयंक जैन ने बताया कि उनकी संस्था हिंदी-यूएसए न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी सहित अमेरिका के बीस शहरों में हिंदी का पाठ्यक्रम संचालित कर रही है। वहां हिंदी के प्रशिक्षित अध्यापकों की कमी है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को विदेशों में हिंदी में रोजगार के अवसरों की पहचान करनी चाहिए। वे शिक्षण, मीडिया, आईटी आदि क्षेत्रों में रोजगार पा सकते हैं। विद्यार्थियों को समूहबद्ध कार्य करना चाहिए, इसके लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप पर ग्रुप बनाकर एक दूसरे को सूचना और ज्ञान साझा करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “नेटवर्किंग”, “क्या करना है और कैसे करना है”, अपने करियर के लिए वैश्विक सोच, सही ज्ञान फिर रुचि और फिर नए आइडियाज़ को पूरी मेहनत से चरितार्थ करना होगा। इन सभी प्रयासो में सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म जैसे की फेसबुक, इंस्टाग्राम इत्यादि का उपयोग सार्थक सिद्ध हो सकता हैं। मयंक ने बताया कि उन्होंने प्राइमरी-मिडिल सेक्टर-1 और हायर सेकंडरी की पढ़ाई भिलाई विद्यालय सेक्टर-2 से हिंदी माध्यम में की और आगे उनकी सफलता में भाषा और संस्कृति की प्रमुख भूमिका रही है। समारोह की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा ने कहा है हिंदी भाषा में हमारी संस्कृति रची-बसी है। विद्यार्थियों को अपने करियर को आगे बढ़ाने ऐसे विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लेते रहना चाहिए।

 विशिष्ट अतिथि साहित्यकार डॉ. परदेशी राम वर्मा ने कहा कि व्यक्ति को आज बहुआयामी होना पड़ेगा। एक प्राध्यापक और विद्यार्थियों के पास मूल काम के अलावा भी समय है। समाज को देने का दायित्व भी निभाना चाहिए। उन्होंने भिलाई से अमेरिका जाकर हिंदी की सेवा कर रहे मयंक के योगदान की भी सराहना की।

लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन ने हिंदी के वैश्विक परिवेश में भारतवंशियों के दुनिया भर में प्रवास और हिंदी फिल्मों की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं लेखक बद्री प्रसाद पारकर ने हिंदी के वैश्विक स्वरूप पर चर्चा की। इस अवसर पर संस्कृत के विद्वान और पूर्व प्राचार्य डॉ. महेश चंद्र शर्मा ने अपनी पुस्तकों का एक सेट प्राचार्य डॉ. विनय शर्मा और हिंदी सेवी मयंक जैन को सौंपा।

अतिथियों का स्वागत डॉ. फिरोजा जाफर अली, डॉ. अंजन कुमार, कैलाश ठाकुर, अंशुल तिवारी और वृंदा जैन आदि ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से प्राध्यापक डॉ. अनुराग पांडेय, डॉ. एन पापा राव, प्रो. अरूणा चौबे, साक्षी तिवारी और मजहर खान सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे। समारोह का संचालन जितेन्द्र साहू ने किया। अंत में महाविद्यालय परिवार की ओर से मयंक जैन का अभिनंदन किया गया।

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