भिलाई। कहते हैं सपने वही सच होते हैं, जिनके पीछे संघर्ष, धैर्य और अपनों का विश्वास खड़ा हो। चरोदा बस्ती की होनहार बेटी ज्योति निषाद ने यह बात सच कर दिखाई है। दादा-दादी, नाना नानी की प्रेरणा, माता-पिता के त्याग और अपनी अटूट मेहनत के बल पर ज्योति का चयन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में हुआ है, जिससे उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव और समाज का नाम रोशन किया है। प्रशिक्षण के बाद चरोदा में लौटने पर बेटी ज्योति के स्वागत में फूल बरसाए गए।
ज्योति ने दसवीं कक्षा से ही डिफेंस की तैयारी शुरू कर दी थी। वह अपने नाना-नानी के घर राजनांदगांव में रहकर महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल से दसवीं उत्तीर्ण हुईं। पढ़ाई के साथ-साथ सेना के प्रति उनका झुकाव शुरू से रहा। ज्योति बताती हैं कि देशसेवा का सपना उनके मन में बचपन से था, जिसे दादा-दादी का मार्गदर्शन और आशीर्वाद लगातार मजबूती देता रहा।

असफलता से नहीं टूटी हिम्मत
चरोदा निवासी भागवत निषाद की इकलौती बेटी ज्योति ने एसएससी की परीक्षा दो बार दी, लेकिन दोनों बार अंक कम रहने के कारण सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। पूरे आत्मविश्वास के साथ 2024-25 में तीसरी बार प्रयास किया औश्र लिखित परीक्षा के साथ फिजिकल और मेडिकल टेस्ट भी सफलतापूर्वक पास किए और आखिरकार बीएसएफ में उनका चयन हो गया।

बेटी के सपने के लिए पिता ने बेची जमीन
ज्योति की सफलता के पीछे परिवार का त्याग भी उतना ही बड़ा है। बीएसएफ प्रशिक्षण के दौरान आने वाले खर्च के लिए पिता भागवत निषाद के पास पर्याप्त साधन नहीं थे। लेकिन बेटी के सपने को टूटने नहीं दिया। उन्होंने जमीन तक बेच दी। पिता कहते हैं, “बेटी का सपना पूरा करना ही हमारे लिए सबसे बड़ा गर्व है।” मां टेमिन निषाद ने भी हर कदम पर बेटी का हौसला बढ़ाया। माता-पिता के कहने पर ज्योति ने 21 जनवरी 2025 को बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर बैकुंठपुर, सिलीगुड़ी में प्रशिक्षण ज्वाइन किया। शुरुआती दो दिन वह भावुक होकर रोईं, लेकिन मजबूत इरादों ने उन्हें टूटने नहीं दिया। अधिकारियों के प्रोत्साहन और अपनी कड़ी मेहनत से उन्होंने कठिन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने एसएलआर-47, मैप रीडिंग सहित सभी जरूरी सैन्य दक्षताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
पासिंग आउट परेड के बाद मिली तैनाती
प्रशिक्षण पूर्ण होने पर पासिंग आउट परेड के बाद 29 दिसंबर को ज्योति को 87वीं बटालियन, नॉर्थ बंगाल में जॉइनिंग मिली। उन्हें ब्रैवो कंपनी, वेस्ट बंगाल में तैनात किया गया। ज्वाइनिंग से पहले जब वह अपने पैतृक गांव चरोदा पहुंचीं तो पूरे गांव ने उनका भव्य स्वागत किया। बैंड-बाजे के साथ उन्हें घर तक लाया गया, रास्ते में हनुमान मंदिर में दर्शन किए गए। निषाद समाज और स्कूल परिवार द्वारा सम्मान समारोह आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया गया।

ज्योति निषाद की सफलता आज हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा है। उनका कहना है, “मेहनत, धैर्य और परिवार का साथ हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं।” साधारण परिवार से निकलकर बीएसएफ जवान बनने वाली ज्योति ने यह साबित कर दिया कि सपनों की उड़ान के लिए हालात नहीं, हौसले मायने रखते हैं।


