प्रतिपदा तिथि क्षय होने के बावजूद पूरे नौ दिन होगी देवी आराधना, दोपहर तक रहेगा कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
भिलाई, वाराणसी, वसंत ऋतु के आगमन के साथ चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होने वाला वासंतिक नवरात्र इस वर्ष 19 मार्च से आरंभ होगा। प्रतिपदा तिथि क्षय होने के बावजूद पूरे दिन प्रतिपदा मिलने के कारण घर-घर में कलश स्थापना कर आदिशक्ति की आराधना की जाएगी और यह पर्व पूरे नौ दिनों तक चलेगा। नवरात्र का समापन 27 मार्च को भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव राम नवमी के साथ होगा।
सुबह 6:41 बजे तक अमावस्या, इसके बाद लगेगी प्रतिपदा
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष और श्रीकाशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री प्रो. विनय कुमार पांडेय के अनुसार चैत्र कृष्ण अमावस्या 19 मार्च को सुबह 6:41 बजे तक रहेगी। इसके बाद प्रतिपदा तिथि शुरू होगी, जो 20 मार्च को सूर्योदय से पहले सुबह 5:30 बजे तक रहेगी। इसी कारण नवरात्र व्रत और पूजा का आरंभ 19 मार्च से ही माना जाएगा और उसी दिन मंदिरों व घरों में कलश स्थापना की जाएगी।

कलश स्थापना का शुभ समय दोपहर 12:25 बजे तक
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा में चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग का अभाव है। इसलिए प्रातःकाल से दोपहर 12:25 बजे तक कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त रहेगा। यदि किसी कारणवश इस समय में स्थापना न हो सके तो श्रद्धालु रात्रि तक भी कलश स्थापना कर सकते हैं।
महाअष्टमी 26 मार्च को, महानवमी 27 मार्च को
बीएचयू के ज्योतिष विभाग के प्रोफेसर प्रो. सुभाष पांडेय के अनुसार
- महाअष्टमी व्रत 26 मार्च को रखा जाएगा, जिसका पारण 27 मार्च को होगा।
- महानवमी व्रत 27 मार्च को रखा जाएगा और पारण 28 मार्च को सुबह 10:30 बजे तक किया जा सकेगा।
राम नवमी पर होगी व्रत की पूर्णाहुति
नवरात्र व्रत की पूर्णाहुति 27 मार्च को दोपहर 12:27 बजे तक हवन-पूजन के साथ की जा सकेगी। इसी दिन राम नवमी पर श्रद्धालु भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाएंगे।
इस बार पालकी पर होगा माता का आगमन
ज्योतिर्विद दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार ज्योतिषीय गणना के मुताबिक इस वर्ष देवी का आगमन पालकी पर होगा, जबकि प्रस्थान गज वाहन से माना जा रहा है।


