निगम कर्मचारियों के आक्रोश पर सभापति का बयान: आंदोलन जरूरी

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सभापति कृष्णा चंद्राकर ने कहा कर्मचारियों लंबे समय से पीड़ित हैं, बहुत तकलीफ़ मे हैं

“निगम कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर मैं कहना चाहता हूँ कि कर्मचारियों की पीड़ा आज उजागर हुई है। ये लोग लंबे समय से पीड़ित हैं, बहुत तकलीफ़ में हैं। कई बार महापौर जी से और आयुक्त महोदय से मैं मिला हूँ, और कहा भी है कि कर्मचारियों की समस्याओं पर ध्यान दें। लेकिन हमारे महापौर और आयुक्त का रवैया बेहद उदासीन रहा है।

आज आंदोलन इसलिए भड़क गया क्योंकि कर्मचारियों की बातें लगातार अनसुनी की गईं। ट्रांसफर मनमाने ढंग से किए जाते हैं, बिना किसी सलाह के। किसी को कहीं भी भेज दिया जाता है, जिन्हें कार्य का अनुभव नहीं होता, उन्हें भी ज़िम्मेदारी दे दी जाती है।
कर्मचारियों की पेंशन और वेतन से संबंधित कुछ राशि है, जो किसी अन्य फंड में चली गई है या उसका उपयोग कर लिया गया है। अब जब पैसे की ज़रूरत है तो वह उपलब्ध नहीं है। यह बहुत गंभीर विषय है, और महापौर व आयुक्त दोनों को इसकी जानकारी होनी चाहिए कि पैसा कहां से आएगा और कैसे व्यवस्था होगी।

इन दोनों का न तो जनता के प्रति कोई उत्तरदायित्व का भाव दिखता है और न ही कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता। मैं कई बार अपने साथी नेताओं से भी कह चुका हूँ कि हमें मिलकर कोई ठोस राय बनानी चाहिए। भिलाई नगर निगम क्षेत्र में जो जमीन कब्जे में है, उसे मुक्त करवा कर शासन के निर्धारित दर पर बेचना चाहिए, जिससे कम से कम 15-20% राजस्व प्राप्त हो सकता है। लेकिन आयुक्त ने उस प्रक्रिया को भी निरस्त कर दिया।

आज जो आक्रोश है, वह इन्हीं कारणों से है — अधिकारियों की अनदेखी, मनमानी और लापरवाही। कर्मचारी बेहद नाराज़ हैं। प्लेसमेंट के कर्मचारियों की स्थिति और भी खराब है; उनका वेतन तक तय नहीं हो पा रहा है, और उन्हें हटाने की धमकी दी जाती है।

रेगुलर कर्मचारियों को हटाया नहीं जा सकता, इसलिए वे मजबूरी में काम कर रहे हैं। मैं कर्मचारियों के साथ हूँ और जब भी जरूरत होगी, उनके साथ खड़ा रहूँगा।

यहाँ तक कि सदन में भी विपक्ष को साथ लेकर कोई ठोस चर्चा नहीं होती। हम सत्ता पक्ष में हैं, लेकिन हमें भी सलाह दी जानी चाहिए, ताकि नगर निगम की भूमि को उपयोग में लाया जा सके और राजस्व बढ़ाया जा सके।

सिर्फ ठेकेदारों के हित में कार्य हो रहे हैं। मैं भी मानता हूँ कि ठेकेदारों के हित से ऊपर कर्मचारियों और जनता का हित होना चाहिए। इसलिए मैं कर्मचारियों के साथ हूँ और उनके हक़ की लड़ाई में उनका समर्थन करूंगा। धन्यवाद।”

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