कुटुंब न्यायालय में सामने आ रहे चौंकाने वाले मामले
रायपुर, कुटुंब न्यायालय में इन दिनों ऐसे वैवाहिक विवाद सामने आ रहे हैं, जो रिश्तों की संवेदनशीलता और सामाजिक सोच पर सवाल खड़े कर रहे हैं। कई मामलों में कम शिक्षित पतियों ने अपनी पत्नियों को उच्च शिक्षा दिलाने के लिए आर्थिक व मानसिक सहयोग किया, लेकिन सरकारी नौकरी मिलने के बाद पत्नियों को पतियों की शिक्षा, रहन-सहन और पेशे से शर्म महसूस होने लगी। परिणामस्वरूप उन्होंने विवाह विच्छेद के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।
ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश में सामने आया है, जिसमें पति पेशे से पुरोहित हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को पहले स्नातक कराया और फिर पढ़ाई में सहयोग कर उसे सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) बनवाया। सरकारी पद मिलने के बाद पत्नी ने पति को अपने सामाजिक स्तर के अनुरूप नहीं मानते हुए तलाक की अर्जी दाखिल की। पत्नी का कहना है कि पति धोती-कुर्ता पहनते हैं और शिखा (चुटिया) रखते हैं, जिसके कारण वह उनके साथ सार्वजनिक स्थानों पर जाने में शर्म महसूस करती है।
इसी प्रकार एक अन्य मामले में पति किसान है और स्वयं 12वीं तक शिक्षित हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को स्नातक, स्नातकोत्तर तथा बीएड तक पढ़ाया। वर्तमान में पत्नी सरकारी स्कूल में शिक्षिका है। नौकरी मिलने के बाद उसने किसान पति के साथ रहने से इनकार कर दिया और वैवाहिक संबंध समाप्त करने की मांग की है। न्यायालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जहां शिक्षा और नौकरी के बाद सामाजिक हैसियत को वैवाहिक रिश्तों से ऊपर रखा जा रहा है। यह स्थिति न केवल पारिवारिक मूल्यों को प्रभावित कर रही है, बल्कि समाज में बढ़ती मानसिक दूरी को भी उजागर कर रही है।


