भिलाई की धरती पर उमड़ा आस्था का सैलाब, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के आगमन से गूंजा हनुमान भक्ति का जयघोष

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भिलाई। धर्म, आस्था और भक्ति की त्रिवेणी उस समय साकार हो उठी जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री गुरुवार को भिलाई पहुंचे। उनके आगमन के साथ ही पूरे नगर का वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया। रायपुर से भिलाई तक के मार्ग में जगह-जगह हिंदूवादी संगठनों और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा, जयकारों और ढोल-नगाड़ों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। खुली वाहन में सवार पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हाथ जोड़कर मुस्कुराते हुए श्रद्धालुओं का अभिवादन करते नजर आए, मानो स्वयं हनुमान भक्ति का सजीव स्वरूप नगरवासियों के बीच उपस्थित हो।

भिलाई में 25 से 29 दिसंबर तक आयोजित होने वाली श्री हनुमंत कथा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। यह दिव्य आयोजन जयंती स्टेडियम के समीप विशाल मैदान में किया जा रहा है, जहां आयोजन समिति ने लगभग एक लाख श्रद्धालुओं के बैठने की भव्य व्यवस्था की है। विशाल पंडाल, सुसज्जित मंच और भक्तिमय वातावरण इस कथा को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी में जुटा है।

कथा के आयोजक सेवा समर्पण समिति के संयोजक राकेश पाण्डेय ने बताया कि कथा के शुभारंभ से पूर्व भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। उन्होंने बताया कि आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। साफ-सफाई, सुव्यवस्थित पार्किंग, पेयजल, भोजन एवं चिकित्सा सुविधा के साथ-साथ मजबूत सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
सुरक्षा के मद्देनज़र पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और उनकी निगरानी के लिए अलग से कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है, ताकि श्रद्धालु निश्चिंत होकर कथा का श्रवण कर सकें।

कथा प्रारंभ होने से एक दिन पूर्व ही दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं का जमावड़ा आयोजन स्थल पर देखने को मिला। कोई अपने परिवार संग तो कोई भक्ति में लीन होकर प्रभु हनुमान की कथा सुनने को आतुर नजर आया। चारों ओर “जय श्रीराम” और “जय बजरंगबली” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय ऊर्जा से भर उठा।
भिलाई में आयोजित यह श्री हनुमंत कथा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का भव्य उत्सव बनकर नगर के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ने जा रही है।

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