भिलाई-तीन में कवि हेमंत मढरिया के काव्य संग्रह “पांव शिखर तक” पर निजी समारोह आयोजित

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संघर्षों में ही निखरता है जीवन का सच्चा स्वरूप : डॉ. नौशाद सिद्दीकी

संघर्षों से शिखर तक : हेमंत मढरिया की कविताओं का प्रेरक संसार

भिलाई-तीन। कवि हेमंत मढरिया के काव्य संग्रह “पांव शिखर तक” पर आयोजित एक निजी समारोह में अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्यकार डॉ. नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि जीवन का सच्चा स्वरूप संघर्षों में ही पलता है। हेमंत मढरिया ऐसे कवि हैं, जिन्होंने संघर्षों के बीच स्वयं को गढ़ा और विपरीत परिस्थितियों में भी रचनात्मकता को जीवित रखा। दुर्घटना काल में पांव टूटे होने के बावजूद उन्होंने श्रेष्ठ साहित्य सृजन कर यह सिद्ध किया कि हौसले ही जीवन की वास्तविक ताकत होते हैं।

डॉ. सिद्दीकी ने कहा कि काव्य संग्रह “पांव शिखर तक” की रचनाएं पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। उनकी कविताओं में प्रकृति, पर्यावरण तथा माता-पिता के प्रति गहन प्रेम और श्रद्धा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। पिता पर लिखी पंक्तियों में वे कहते हैं—
“संकटों का पहाड़ हो या दुखों का अतिमार, पिता हंसते होते हैं हरदम कि हंसता रहे घर-परिवार।”

मां के प्रति भावनाओं को व्यक्त करते हुए कवि लिखते हैं—
“मन को सुकून मेरे लिए प्रतिपल सुखद एहसास है मां से, दूर रहकर भी मेरी मां का।”

डॉ. सिद्दीकी ने कहा कि कवि अपनी रचनाओं में यह भी संकेत देते हैं कि संघर्ष और पीड़ा से ही रचनात्मक शक्ति जन्म लेती है—
“चलने लगेंगे धीरे-धीरे, दौड़ पड़ेंगे उत्साहित हो।”

उन्होंने कहा कि कवि ने अंततः दुख पर विजय प्राप्त की—
“टूटे पैर हंसते रहे, हंसाते रहे मित्र, हंसों की हंसी ही दुखों पर जय है।”

प्रकृति से प्रेरणा लेते हुए कवि कहते हैं—
“रुकता नहीं कभी जल का प्रवाह, सृजनशील मनुष्य जलधाराएं।”

वात्सल्य भाव की एक मार्मिक झलक प्रस्तुत करते हुए कवि लिखते हैं—
“बेटी छोड़ने आती है बस तक, बस निकल जाती है गंतव्य के लिए, सोचता हूं कौन छूटा—बस, बेटी या मन।”

डॉ. सिद्दीकी ने “संभावनाओं की पौध” शीर्षक रचना का उल्लेख करते हुए कहा कि कवि असहनीय पीड़ाओं को मौन सहकर अपनी आंसुओं से नई संभावनाओं को जन्म देते हैं। उन्होंने कवि के हौसलों को सलाम करते हुए कहा—
“हड्डियां हो गई चूर-चूर,
डरे नहीं, सहते रहे दर्द और खड़े रहे,
कि जिंदगी हौसलों से चलती रहे।”

समारोह के अंत में डॉ. नौशाद सिद्दीकी ने हेमंत मढरिया को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे भविष्य में और भी बेहतर लिखें तथा शीघ्र ही उनका दूसरा काव्य संग्रह प्रकाशित हो।

इस अवसर पर सपना मढरिया, हमीदुन सिद्दीकी, आंचल मढरिया, कान्हा मढरिया, दीक्षा वर्मा, चंचल, शेख हुसैन, मैडम हुसैन, दुष्यंत वर्मा, सुधा वर्मा, आशी, आरु वर्मा, शीतल, जिशान सिद्दीकी और शाहनवाज सिद्दीकी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।

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