होली का रंगोत्सव परसों बुधवार को, ग्रहण के अगले दिन रंगों की धूम, शाम 5:58 बजे ग्रस्तोदित होगा चंद्रोदय, 6:48 बजे ग्रहण से मोक्ष
ग्रहण काल में रखें सावधानी, सूतक और पूजा के समय में बदलाव
काशी में चंद्रोदय के साथ दिखेगा खंड चंद्रग्रहण, रंगोत्सव 4 मार्च को
ग्रहण का सूतक सुबह से प्रभावी, भद्रा पुच्छ में होगा होलिका दहन
भिलाई, वाराणसी फाल्गुन पूर्णिमा पर इस वर्ष होली का रंगोत्सव खंड चंद्रग्रहण के कारण एक दिन आगे बढ़ गया है। परंपरा के अनुसार होलिका दहन के अगले दिन रंग खेला जाता है, लेकिन इस बार मंगलवार को पड़ रहे चंद्रग्रहण के कारण रंगोत्सव बुधवार, 4 मार्च को मनाया जाएगा।
चंद्रोदय के साथ शुरू होगा दृश्य ग्रहण
ज्योतिषीय गणना के अनुसार खंड चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे से प्रारंभ होकर सायं 6:18 बजे तक रहेगा। हालांकि भारत के अधिकांश हिस्सों में चंद्रमा ग्रहण लगा हुआ ही उदित होगा।
धार्मिक नगरी वाराणसी में चंद्रोदय सायं 5:58 बजे होगा और यहां ग्रहण 6:48 बजे तक दिखाई देगा। स्थानीय मान्यता के अनुसार जिस क्षेत्र में ग्रहण जिस समय दिखाई देता है, वहीं से उसका प्रभाव माना जाता है।
सूतक काल का समय
काशी में ग्रहण का सूतक नौ घंटे पूर्व यानी सुबह 8:53 बजे से प्रभावी होगा। सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और जप, तप, हवन व मंत्रजाप के अतिरिक्त अन्य मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।
विद्वानों के अनुसार ग्रहण मोक्ष के समय स्नान और दान का विशेष महत्व होता है।
भद्रा पुच्छ में होगा होलिका दहन
इस वर्ष भद्रा काल रात्रि पर्यंत रहने के कारण होलिका दहन भद्रा पुच्छ में किया जाएगा। पंडितों के मुताबिक सोमवार रात 12:50 बजे से 2:02 बजे के मध्य होलिका दहन का शुभ मुहूर्त रहेगा।
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम से प्रारंभ होकर 3 मार्च की शाम तक रहेगी, जबकि 3 मार्च की शाम से चैत्र कृष्ण प्रतिपदा लग जाएगी।
रंगोत्सव एक दिन बाद
चूंकि 3 मार्च को ग्रहण का प्रभाव रहेगा, इसलिए रंगोत्सव 4 मार्च को मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि ग्रहण के दिन उत्सव, भोज और शुभ कार्य टालना शास्त्रसम्मत माना गया है।
धर्मनगरी में श्रद्धालु ग्रहण काल में गंगा स्नान, मंत्रजाप और दान-पुण्य को विशेष महत्व दे रहे हैं।
(धार्मिक एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित जानकारी)


