दुर्ग में कवि, रंगकर्मी और लोक कलाकारों का ऐतिहासिक संगम

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77वें गणतंत्र दिवस और बसंतोत्सव पर एक मंच से कविता, गीत और संगीत की साझा प्रस्तुति, ददरिया संग्रह का हुआ विमोचन

दुर्ग, अभिभाषक साहित्य संसद दुर्ग क्षितिज रंग शिविर दुर्ग और आइडियल क्रिएशन वेल्फेयर सोसायटी दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के सभागार में दुर्ग भिलाई के कवियों रंगकर्मियों और लोक कलाकारों के द्वारा 77 वां  गणतंत्र दिवस और बसंतोत्सव का आयोजन किया गया । कवियों और कलाकारों का सामूहिक संगम पहली बार देखने को मिला । एक ही मंच पर उपस्थित होकर सभी ने अपनी अपनी विधा में कविता गीत गजल सहित संगीत की प्रस्तुति दी ।

कार्यक्रम की शुरूआत मां सरस्वती की वंदना और पूजन के साथ हुआ। कार्यक्रम में  सुमित्रा कामड़िया ” शिशिर ” की कृति ददरिया संग्रह “गांव मया के चलो बसाबो” का विमोचन भी किया गया । कार्यक्रम में अभिभाषक साहित्य संसद दुर्ग के अध्यक्ष आर एस यादव, अधिवक्ता संघ की अध्यक्ष नीता जैन, दुर्ग भिलाई अंचल के प्रसिद्ध कलाकार भानुजी राव, रवि दुबे, गोपाल शर्मा, नकुल महलवार, भारत भूषण परगनिहा, जय कसेर, डी के शर्मा, जयराम भगवानी, प्रकाश ताम्रकार, अर्जुन परमार, जागेश्वरी मढ़रिया, शिवनारायण कामड़िया, वरिष्ठ कवियत्री बीना सिंह, पुष्पलता साहू, कंचनबाला, उमा भारती साहू, कवि सुशील यादव, डा. नौशाद सिद्दीकी, रियाज खान गौहर, प्रशांत जोशी, ताराचंद मथुरिया, समीर त्रिपाठी, राजेश महाड़िक, गुलाम नबी, नुरुससबा खान, शबा फरीदा शाहीन, नीलम, तरन्नुम निशा, अलकरहा आदि ने काव्य पाठ किया। इस कार्यक्रम में मानस मर्मज्ञ अभयराज सिंह, गुलाब सिंह पटेल, ऋषिकांत तिवारी, रविशंकर मानिकपुरी, संघ के सचिव रविशंकर सिंह, अमित अग्ने, चन्द्रिका देवांगन, शकील खान सहित सैकड़ो लोग उपस्थित थे । कार्यक्रम का सफल संचालन प्रसिद्ध रंगकर्मी योगेश पाण्डेय ने किया ।

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