ऐतिहासिक तालाब का होगा सौंदर्यीकरण, बनेगा नया आकर्षण केंद्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन को नई पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के अंतर्गत कबीरधाम जिले में स्थित प्रसिद्ध भोरमदेव मंदिर परिसर का 100 करोड़ से अधिक रुपये की लागत से भव्य कॉरिडोर के रूप में विकास किया जाएगा। यह परियोजना काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर तैयार की जा रही है, जिससे भोरमदेव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन इसी माह के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत शामिल करने की तैयारी है। राज्य सरकार के अनुसार, यह परियोजना न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।
भोरमदेव मंदिर के इतिहास में यह पहली बार होगा जब इतनी व्यापक और आधुनिक सुविधाओं के साथ विकास कार्य किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत मुख्य मंदिर परिसर, मड़वा महल, छेरकी महल, रामचुआ, और सरोधा दादर तक कॉरिडोर का समग्र और सुनियोजित विकास किया जाएगा। इन सभी स्थलों को आपस में जोड़ते हुए एक सुव्यवस्थित पर्यटन मार्ग विकसित किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक ही परिसर में ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव प्राप्त हो सके।

कॉरिडोर परियोजना के तहत छह भव्य प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जो वास्तुकला और स्थानीय संस्कृति को दर्शाएंगे। इसके साथ ही पार्क, संग्रहालय, परिधि दीवारों का संवर्धन, आकर्षक बाउंड्री वॉल, साज-सज्जा, पेयजल के लिए बोरवेल, शेड, बिजली व्यवस्था, आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम और व्यापक स्तर पर पौधरोपण की योजना शामिल है। हरित क्षेत्रों के विकास से परिसर को पर्यावरण के अनुकूल बनाया जाएगा।
परियोजना की एक प्रमुख विशेषता ऐतिहासिक तालाब का सौंदर्यीकरण है। तालाब की सफाई, जल गुणवत्ता में सुधार, किनारों पर हरित क्षेत्र, बैठने की व्यवस्था और पैदल पथ विकसित किए जाएंगे, जिससे यह स्थान श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।

इसके अतिरिक्त, भोरमदेव मंदिर में प्रतिवर्ष आने वाले हजारों कांवड़ यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक शेडों का निर्माण किया जाएगा। इन शेडों में पेयजल, स्वच्छ शौचालय, विश्राम स्थल और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था होगी। इससे श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और व्यवस्थित ठहराव मिल सकेगा।
परियोजना के अंतर्गत वाटर ट्रीटमेंट जैसी आधुनिक पहल भी की जा रही है, जो मंदिर परिसर की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। यह पहल भोरमदेव को एक आदर्श धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेगी।
कुल मिलाकर, भोरमदेव कॉरिडोर परियोजना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए उसे आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य के पर्यटन विकास को भी नई ऊंचाइयां प्राप्त होंगी।


