पानी में ‘पौवा’! मछली के जाल में निकले शराब की बोतलें, मचा हड़कंप

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पाटन ब्लाक के सेलूद ग्राम पंचायत  जहां तांदूला नहर अब अवैध शराब कारोबारियों की वाटरप्रूफ तिजोरी बनती जा रही है

पुलिस कार्रवाई से बौखलाए शराब कोचियों की नई तरकीब
पानी के भीतर ‘नशे का खजाना’ छिपाने का खेल शुरू
भिलाई । पानी में मछली पकड़ने उतरे लोगों को जब जाल में मछलियों के बजाय शराब के पौवे निकाले, तो पूरे गांव में सनसनी फैल गई। यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि पाटन ब्लाक के सेलूद ग्राम पंचायत की हकीकत है, जहां तांदूला नहर अब अवैध शराब कारोबारियों की वाटरप्रूफ तिजोरी बनती जा रही है।

आज दोपहर सेलूद के पास बोहरडीह मोड़ पुलिया के नीचे कुछ ग्रामीण मछली पकड़ने जाल डाल रहे थे। मगर जब उन्होंने जाल बाहर निकाला, तो उसमें मछलियों की जगह देशी शराब के पौवे फंसे हुए थे। जाल में 4 से 5 पौवा देखकर पहले तो बच्चे चौंके, फिर देखते ही देखते आसपास के लोग वहां पहुंचने लगे और नहर में शराब खोजो अभियान शुरू हो गया।

स्थानीय लोगों ने जैसे ही नहर के अंदर और तलाशी ली, तो वहां और भी पौवे मिलने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सेलूद और आसपास के इलाकों में अवैध शराब की बिक्री पर उतई पुलिस ने सख्ती बढ़ा दी है। ऐसे में माना जा रहा है कि कोचियों ने कार्रवाई से बचने के लिए नहर को ही शराब छुपाने का नया अड्डा बना लिया है।
शराब छिपाने का नया पैटर्न!

इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब माफिया अब नए-नए पैंतरों से काम कर रहे हैं। पहले ये शराब खेतों में, झाड़ियों में, या सुनसान घरों में छुपाया करते थे, लेकिन अब पुलिस की नज़रों से बचने के लिए नहर के ठंडे पानी को शराब स्टोरेज बना रहे हैं। प्लास्टिक के थैलों और बोतलों में पौवे भरकर उन्हें नहर के किनारे या पुल के नीचे छिपा दिया जाता है, जिसे रात के अंधेरे में निकालकर ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। घटना के बाद पूरे गांव में यह चर्चा का विषय बन गई है। कुछ लोगों ने तो मजाक में कहा कि अब तो “देशी शराब मछलियों के साथ मुफ्त मिलने लगी है!” वहीं कई बुजुर्गों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है कि गांव का माहौल बिगाड़ने वाले ऐसे कोचियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

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