रायपुर। भोपाल-जबलपुर को जोड़ने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग-45 अब केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि वन्य प्राणियों की सुरक्षा और संरक्षण का देशव्यापी माडल बनकर उभरा है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की परियोजना कार्यान्वयन इकाई, जबलपुर द्वारा नरसिंहपुर और जबलपुर के बीच लगभग 12 किलोमीटर लंबे अति संवेदनशील वन क्षेत्र में ऐसे नवाचार किए गए हैं, जो राजमार्ग इंजीनियरिंग के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
यह मार्ग वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (पूर्व में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य) की सीमा से होकर गुजरता है। पहाड़ी भू-भाग, अंधे मोड़ और वन्यजीवों की निरंतर आवाजाही के कारण यह क्षेत्र पहले राजमार्ग चौराहा से बेलखेड़ा तक एक बड़ा ब्लैक स्पॉट माना जाता था, जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती थीं। अब यह खंड देशभर में सुरक्षित सड़क और वन्यजीव संरक्षण के आदर्श मॉडल के रूप में पहचाना जा रहा है।
अभिनव तकनीक से सुरक्षित हुआ राजमार्ग
करीब ₹122.25 करोड़ की लागत से 11.96 किलोमीटर लंबे इस खंड को दो लेन से चार लेन में विस्तारित किया गया है। परियोजना के तहत यात्रियों के साथ-साथ वन्य प्राणियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इस पूरे हिस्से में 5 मिमी मोटी लाल रंग की उभरी हुई टेबल टॉप रेड मार्किंग की गई है। इस पर वाहन के गुजरते ही हल्का झटका महसूस होता है, जिससे चालक स्वतः ही वाहन की गति कम कर देता है। लाल रंग दूर से ही दिखाई देता है, जो चालकों को सतर्क करता है। स्थानीय लोगों ने इसकी सुंदरता और सुरक्षा को देखते हुए इसे द्यरेड कार्पेट रोडद्ग नाम दिया है।
वन्य प्राणियों की निर्बाध और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस खंड में विशेष इंतजाम किए गए हैं, इसमें 25 अंडरपास (पुलिया) जिससे जंगली जानवर बिना किसी खतरे के राजमार्ग के नीचे से एक ओर से दूसरी ओर जा सकें। पूरे संवेदनशील क्षेत्र में बाड़ लगाकर वन्यजीवों को सड़क पर आने से रोका गया है, जिससे सड़क हादसों में उल्लेखनीय कमी आई है। रात के समय होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सड़क के दोनों किनारों पर 5 मिमी मोटी व्हाइट शोल्डर लाइन बनाई गई है। वाहन यदि अनजाने में किनारे की ओर जाता है तो यह लाइन तेज कंपन के माध्यम से चालक को तुरंत सतर्क कर देती है।
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्य प्राणियों के प्राकृतिक आवास और आवागमन को सुरक्षित रखना है। यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि भविष्य में यह मार्ग दोबारा ब्लैक स्पॉट न बने, बल्कि देश के लिए सड़क सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करे।
एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अमृत साहू ने बताया कि यह मार्ग घने वन क्षेत्र और पहाड़ी भूभाग से होकर गुजरता है, जहां अंधे मोड़ हैं। इसे ध्यान में रखते हुए गति नियंत्रक उपकरण लगाए गए हैं और सड़क पर टेबल टॉप रेड मार्किंग की गई है। लाल रंग दूर से ही दिखाई देता है, जिससे वाहन चालक स्वतः गति कम कर लेते हैं। इससे दुर्घटनाओं में कमी आई है।


