अब सरकारी दफ्तरों में बिजली भी होगी ‘प्रीपेड’: पहले रिचार्ज, फिर काम

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प्रीपेड मीटर से खत्म होगी देरी और फाइलों की बाधा, हर माह 60 करोड़ का बढ़ता सरचार्ज बन रहा बोझ

रायपुर, बिलासपुर, प्रदेश में सरकारी दफ्तरों पर बिजली बिल का भारी बकाया होने के कारण अब व्यवस्था पूरी तरह बदली जा रही है। जनवरी से सभी सरकारी कार्यालयों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। यानी बिजली का उपयोग करने से पहले मोबाइल की तरह रिचार्ज कराना होगा। राशि कम होते ही अलर्ट मैसेज आएगा ताकि समय रहते रिचार्ज किया जा सके।

5000 करोड़ का बकाया, हर महीने 60 करोड़ का सरचार्ज

प्रदेश में सरकारी विभागों के नाम पर करीब 55.63 लाख बिजली कनेक्शन हैं। इन पर लगभग 5000 करोड़ रुपये का बकाया जमा है। बिल समय पर जमा नहीं होने से हर माह 60 करोड़ रुपये का सरचार्ज भी बढ़ रहा है।
घरेलू या व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर वसूली या कनेक्शन काटने की कार्रवाई होती है, लेकिन अस्पताल, नगरीय निकायों और पंचायतों जैसी सेवाओं से जनता सीधे जुड़ी होने के कारण इनके कनेक्शन नहीं काटे जाते। इससे बिजली कंपनियों पर भारी वित्तीय बोझ बढ़ रहा है।

क्यों जरूरी हुआ प्रीपेड मीटर

कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, विभागों को बार-बार नोटिस देना पड़ता है। बकाया और सरचार्ज बढ़ते जाते हैं, जबकि भुगतान की फाइलें वित्तीय मंजूरी में फंसती रहती हैं। प्रीपेड मीटर लगने के बाद विभागों को बिजली के लिए पहले से बजट प्लान करना होगा और बगैर भुगतान उपयोग संभव नहीं होगा। इससे देरी, फाइलों का झंझट और सरचार्ज—सब कम होगा।

भविष्य में घरेलू और व्यावसायिक कनेक्शन भी होंगे प्रीपेड

सरकारी विभागों में व्यवस्था लागू होने के बाद इसे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर भी अनिवार्य किया जाएगा। स्मार्ट मीटर लगाने का काम पहले से जारी है और प्रीपेड प्लान पर भी तेजी से काम किया जा रहा है।

टॉप 10 बकायेदार विभाग

नगरीय निकाय, पंचायत, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, पुलिस, वन, जल संसाधन, बिजली और उद्योग विभाग सबसे बड़े बकायेदार हैं।

बकाया राशि की भी होगी वसूली

स्मार्ट मीटर प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी एम. जामुलकर ने बताया कि प्रीपेड सिस्टम जनवरी से शुरू करने की तैयारी है। साथ ही विभागों पर जो बकाया है, उसकी वसूली भी की जाएगी ।

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