मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को 7 से 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कलेक्टर एवं डीएफओ (वनमंडल अधिकारी) की संयुक्त कॉन्फ्रेंस में वन क्षेत्रों में रह रहे लोगों की आजीविका से जुड़ी योजनाओं की गहन समीक्षा की। बैठक में तेंदूपत्ता संग्राहकों, लघु वनोपज, बांस उत्पाद, औषधीय पौधों की खेती और इको-टूरिज्म को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तेंदूपत्ता संग्राहकों को 7 से 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित किया जाए, और भुगतान की जानकारी SMS के माध्यम से सीधे संग्राहकों को दी जाए। उन्होंने बताया कि अब तक करीब 15 लाख 60 हजार संग्राहकों को इस प्रक्रिया से ऑनलाइन जोड़ा गया है। सभी भुगतान बैंक खातों के माध्यम से होंगे, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, तेंदूपत्ता संग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत करने की पहल भी की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में तेंदूपत्ता संग्रहण की समीक्षा की और आगामी सीजन के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
🌿 लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप को मिलेगा बढ़ावा
वन क्षेत्रों की आजीविका को सशक्त बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि लघु वनोपज आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने वन धन केंद्रों को मजबूत करने, ‘छत्तीसगढ़ हर्बल’ और ‘संजीवनी’ उत्पादों को बढ़ावा देने, और जैविक प्रमाणीकरण प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में इन उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के निर्देश भी दिए।
🌱 औषधीय पौधों की खेती से परंपरागत ज्ञान को मिलेगा बल
धमतरी, मुंगेली और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिलों में औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने की रणनीति पर चर्चा की गई। औषधीय पादप बोर्ड के सीईओ ने इस क्षेत्र की संभावनाओं और ग्रामीणों की आय में वृद्धि की रूपरेखा प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने इस खेती के प्रचार-प्रसार के लिए कृषि और उद्यानिकी विभाग के सहयोग से काम करने के निर्देश दिए।
🎋 बांस आधारित उद्योगों को मिलेगा नया आयाम
राज्य में 3.71 लाख हेक्टेयर में फैले बांस वन क्षेत्र का बेहतर उपयोग करते हुए 28 बांस प्रसंस्करण केंद्रों को सक्रिय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने उच्च बाजार मूल्य वाली बांस की किस्मों को बढ़ावा देने, बांस शिल्पकारों को बाजार से जोड़ने, और विशेष पिछड़ी जनजातियों को बाजार की मांग के अनुसार प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।
🌳 हरियाली और पर्यावरण संरक्षण की पहल
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत अब तक 6 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया जा चुका है। राज्य में माइक्रो अर्बन फॉरेस्ट की शुरुआत की गई है, जिससे शहरी इलाकों में हरियाली बढ़ेगी।
🏞️ इको-टूरिज्म से जुड़े रोजगार के अवसर
राज्य में स्थित 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार उपलब्ध हो रहा है। अभी तक करीब दो हजार परिवार इनसे अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इन केंद्रों को और सशक्त करने के निर्देश दिए।
🐘 गज संकेत ऐप से हाथी-मानव संघर्ष में कमी
हाथियों की ट्रैकिंग के लिए विकसित ‘गज संकेत’ मोबाइल ऐप की सफलता की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि यह ऐप अब देश के छह अन्य राज्यों में भी अपनाया गया है। यह ऐप कम नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी काम करता है और स्थानीय भाषाओं में ग्रामीणों को अलर्ट और जागरूकता प्रदान करता है। फिलहाल यह ऐप 14 वनमंडलों में लागू है, जिसे अगले एक माह में राज्य के सभी मंडलों में लागू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वन आधारित आजीविका, पारदर्शी तकनीकी व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाए, ताकि वनांचल के लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।


