22 अगस्त से आरंभ हुआ अखंड पाठ साहिब 24 अगस्त को संपन्न हुआ
भिलाई, गुरुद्वारा श्री गुरु अरजन देव जी, हाउसिंग बोर्ड, औद्योगिक क्षेत्र, भिलाई में आज आदि ग्रंथ साहिब जी के प्रथम प्रकाश पर्व की 421वीं वर्षगांठ अत्यंत श्रद्धा, प्रेम एवं सद्भाव के साथ मनाई गई। यह पर्व उस ऐतिहासिक दिन की स्मृति में मनाया गया, जब 1604 ई. में पंचम गुरु श्री गुरु अरजन देव जी द्वारा दरबार साहिब अमृतसर में आदि ग्रंथ साहिब जी की प्रथम स्थापना की गई थी।
इस पावन अवसर पर गुरुद्वारे के नव निर्मित दरबार साहिब हॉल का विधिवत उद्घाटन किया गया, जो पिछले 25 वर्षों से संचालित दरबार का एक नूतन एवं सर्वसुविधायुक्त रूप है। संगत की सहमति और सहयोग से निर्मित इस सुसज्जित दरबार साहिब में 21 अगस्त को सुखमनी साहिब के पाठ के साथ गुरु ग्रंथ साहिब जी की पुनः स्थापना की गई थी।
समारोह के दौरान साध-संगत को गुरु ग्रंथ साहिब जी के इतिहास और उनके प्रकाश की गौरवगाथा सुनाई गई। विशेष रूप से यह बताया गया कि 1 सितम्बर 1604 को बाबा बुड्ढा जी द्वारा आदि ग्रंथ साहिब जी को सिर पर उठाकर हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में लाया गया था, जहां गुरु अरजन देव जी ने चौर सेवा की थी। गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोबिंद सिंह जी तक की बाणी एवं 35 अन्य महापुरुषों की वाणी को संकलित कर गुरु ग्रंथ साहिब का अंतिम रूप प्रदान किया गया, जिसे सिख पंथ का “जीवत गुरु” माना जाता है।

इस अवसर पर 22 अगस्त से आरंभ हुआ अखंड पाठ साहिब आज 24 अगस्त को संपन्न हुआ। पाठ समापन के उपरांत हजूरी रागी जत्थों द्वारा कीर्तन एवं गुरबाणी की महिमा का गायन हुआ। तत्पश्चात “सर्वत्र भले की अरदास” कर संगत ने गुरु के उपदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
समारोह के अंत में कढ़ाह प्रसाद और लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में भिलाई के सभी गुरुद्वारों के प्रतिनिधियों सहित छत्तीसगढ़ सिख पंचायत के अध्यक्ष जसबीर सिंह चहल एवं छत्तीसगढ़ सिख यूथ फोरम के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह (छोटू) वीर विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, विशेषकर अध्यक्ष जसबीर सिंह सैनी एवं उनकी समर्पित टीम को इस आयोजन की सफलता पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं।


