कहीं रोशनी, कहीं मुफलिसी की मार… डॉ. नौशाद की ग़ज़ल ने बयां की समाज की तस्वीर
ग़ज़ल
हर घर रौशनी लाई है दिवाली…
हर घर रौशनी लाई है दीवाली,
कोने कोने में मुस्काई है दीवाली।
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इधर फटाके उधर फुलझड़ी छूटी,
राकेट में भी समाई है दीवाली।
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मुफलिस के घर कैसे मनती,
इतनी कहाँ कमाई है दीवाली।
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मिल जुल कर हम सब रहते ऐसे,
बच्चों की नान – खटाई है दीवाली।
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तू भी रख दे नफ़रत ताक में,
स्वछता अभियान चलाई है दीवाली।
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मेरे हिस्से की धूप है गायब,
जैसे अगस्त जुलाई है दीवाली।
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एक दिए की लौ हजार झालर,
हमने मिल के सजाई है दीवाली।
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सब्र भरोसा करना सीखो,
इसी मे सब की भलाई है दीवाली।
डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी, सब्र,
भिलाई तीन, छत्तीसगढ़
Link : https://shricgnewscreator.com/diwali-has-brought-light-to-every-home-a-message-of-love-and-humanity-in-dr-siddiquis-ghazal/








