भरथरी लोकगाथा की सांस्कृतिक और भाषिक विरासत को सहेज रहीं वंदना वर्मा

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भिलाई, छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक विरासत में लोक गीत, लोक कथाओं, पहेलियों, लोकोक्तियों, लोक कथाओं, लोक गाथाओं की विशिष्ट परंपरा है। जिसमें पौराणिक कथाओं सहित लोकप्रिय राजा- महाराजाओं, वीरांगनाओं, वीर नायक-नायिकाओं की गाथाएं भी गाने की विशिष्ट परंपरा प्रचलित है।

इसी कड़ी में उज्जैन के महाराजा भरथरी की जीवन गाथा विभिन्न गाथाकारों के मुख से निरंतर मुखरित होकर छत्तीसगढ़ के जनमानस में भी स्पष्ट रुप से अंकित हो गई है। स्वयं की नारी द्वारा जल किए जाने पर वैराग्य की ओर उन्मुख होकर नाथ परंपरा को स्वीकार करने का उल्लेख लोक गायकों द्वारा किया जाता है। वहीं राजा भरथरी ने खुद श्रृंगार शतक, नीति शतक और वैराग्य शतक जैसे विशिष्ट पंक्तियों की रचना भी की है । उनकी जीवन गाथाएं यहां के लोक कलाकारों के द्वारा ‘भरथरी’ के नाम से गाई जाती है।

स्व. सुरुज बाई खांडे आज तक की विशिष्ट एवं उत्कृष्ट गायिका के रुप में राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रही हैं। इसकी यशस्वी शिष्या कुमारी वंदना वर्मा ने 6 वर्ष की बाल्यावस्था से लेकर अब तक 300 से अधिक मंचों पर भरथरी गायन करते हुए आकाशवाणी, दूरदर्शन सहित अन्य क्षेत्रीय लोक महोत्सवों में अपनी उल्लेखनीय प्रस्तुति दी है। इसके साथ ही सांस्कृतिक स्रोत्र एवं प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली से राष्ट्रीय सांस्कृतिक प्रतिभा खोज परीक्षा योजना में चयनित और वर्तमान में जूनियर फेलोशिप प्राप्त करके भरथरी लोक गाथा की भाषिक, सांस्कृतिक, रुपांतरण और अभिलेखीकरण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।

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इस क्रम में ग्राम उमदा भिलाई के वरिष्ठ बांस लोक गाथा कलाकार संतराम यादव सहित उनके साथियों द्वारा राजा भरथरी की गाथा बॉंस लोक गाथा कड़ी में गाने संबंधी विशिष्ट चर्चाएं की गई। विशेष रुप से बॉंस गाथा में भरथरी का समावेश सहित बॉंस जैसे विशिष्ट लोक वाद्य को प्रचलित लोक शैली में गाने की सांगीतिक परंपराओं को रेखांकित करने का प्रयास किया। अपने द्वारा तैयार 20 बिंदुओं की शोध प्रश्नावली में लोक वाद्य बॉंस की विशेषताओं, उत्पत्ति, पौराणिकता, सामाजिक परंपराओं में बॉंस, बॉंसुरी, अलगोजा, उसके रखरखाव और भरथरी गाथा गाने की परंपरा पर सूक्ष्म प्रश्नों के द्वारा अभिलेखीकरण को विशिष्टता प्रदान करने का प्रयास किया गया है।

राष्ट्रीय स्तर से फेलोशिप योजना के तहत भरथरी लोक गाथा के अभिलेखीकरण अपने मार्गदर्शक एवं जनजाति शोधार्थी राम कुमार वर्मा के सामयिक सहयोग के लिए प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री व विधान सभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, क्षेत्रीय कलाकारों सहित छत्तीसगढ़ की वरिष्ठ लोक गायिका कविता वासनिक, भरथरी की उभरती गायिका हिमानी वासनिक, रेखा जलक्षत्री, पद्मश्री उषा बारले आदि ने हार्दिक शुभकामनाएं दी है।

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