मातृभूमि और मातृभाषा पर गौरव ही विश्व में सम्मान दिलाता है : बलदाऊ राम साहू
भिलाई, हिन्दी दिवस के अवसर पर मंगलवार को समिति अध्यक्ष बलदाऊ राम साहू के सभागार में 'हम और हमारी भाषा हिन्दी' विषय में एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। विषय पर बोलते हुए अध्यक्ष बलदाऊ राम साहू ने कहा कि आज बच्चे आंग्ल भाषा को सीख कर गौरव अनुभव करते हैं यह चिंता का विषय है क्योंकि मां मातृभूमि और मातृभाषा के प्रति गौरव ही भाषा को विश्व में सम्मान दिलाता है।
दुर्ग के वरिष्ठ साहित्यकार कहानीकार गुलबीर सिंह भाटिया ने बताया कि पंजाब से आने के बाद उनकी प्रथम भाषा पंजाबी तथा द्वितीय भाषा हिन्दी थी यहां उन्होंने सुगम हिन्दी से शुरुआत कर साहित्यिक हिन्दी तक की यात्रा की,भाषा में सामर्थ्य के लिए व्याकरण में समर्थ होना आवश्यक है। व्याकरण की दृष्टि से हिन्दी का इतिहास विगत दो सौ बर्ष प्राचीन है जबकि अन्य देशों की भाषा हजार वर्षों में परिपक्व होने के कारण वे पूरे राष्ट्र की भाषा बनीं हैं, हिन्दी अब परिपक्व भी हो रही है और विस्तारित भी।
उपाध्यक्ष संजीव तिवारी ने 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में पारित राजभाषा हिन्दी के प्रस्ताव पर हुई बहस पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की संस्कृति और संस्कारों को जानने के लिए जरूरी है कि हम हिन्दी को जानें। सचिव राकेश गुप्ता रूसिया ने कहा कि पाली प्राकृत संस्कृत भाषा से होते हुए आज देश में धीरे-धीरे हिन्दी बोलने समझने वालों का क्षेत्र बढ़ रहा है राजनैतिक गतिरोध हटते ही वह दिन दूर नहीं जब हिन्दी संपूर्ण राष्ट्र के कामकाज की भाषा बनेगी। इसराइल बेग शाद ने शेर कहा - यूं हिन्दी की अर्थी में हम श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं, हम भारतवासी एक दिन ही हिन्दी दिवस मनाते है, साथ ही कहा कि हिन्दी के उत्थान की शुरुआत हमें अपने घर से ही करनी होगी।
नरेंद्र देवांगन ने मोहल्ले में हिंदी कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव रखा, डाॅ. बीना रागी ने कहा कि बच्चों से वार्तालाप हिन्दी में ही हो ताकि संस्कार जीवित रहें। इसके अलावा डाॅ. ए के सिंह ने राजनैतिक इच्छाशक्ति का अभाव होने तथा धनश्याम सोनी ने हिन्दी के समर्थन में व्यापक आंदोलन शुरू करने का विचार रखा, एन एन पांडे ने भी हिन्दी की ऐतिहासिक यात्रा पर विचार रखे। कार्यक्रम उपरांत काव्य गोष्ठी में उपस्थित अनेक कवियों ने हिन्दी भाषा पर आधारित अपनी कविताओं का पाठ किया।
उन्नत हो यह देश हमारा
यदि यही अभिलाषा हो
काश्मीर से कन्याकुमारी तक
सब की एक ही भाषा हो।
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