साहित्यकारों से सजा दुर्ग का मंच, डॉ. संजय दानी की ‘गुस्ताख़ी माफ़’ का हुआ विमोचन

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दुर्ग, 30 अगस्त, रविवार की दोपहर डाॅ. संजय दानी की किताब ” गुस्ताख़ी माफ़ ” जो एक कहानी संग्रह है का विमोचन आईएमए भवन, मोहन नगर दुर्ग में गरिमामयी माहौल में संपन्न हुआ। दुर्ग भिलाई के लगभग 100 साहित्यकार इस विमोचन समारोह के साक्षी बन कार्यक्रम को सफल भी बनाये और कार्यक्रम की गरिमा भी बढाते रहे।

उक्त कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  संजय अलंग (आईएएस) ने अपने उद्बोधन में कहा कि डाक्टर दानी की अधिकांश कहानियों के केंद्र बिन्दू दुर्ग शहर के आस पास के गांव हैं और उनके पात्र भी हमारे बीच के ही लोग हैं। उनके अनुसार डाॅ. दानी की सारी कहानियां आपसी सौहार्द की बातें करती नज़र आ रही हैं। संजय अलंग  के उद्बोधन से यह बात भी निकल कर आई कि जब तक हम अपने आसपास, अपने समाज, अपने शह्र की बातों को, व समस्याओं को अच्छे से न समझे व उनका समाधान ढूंढने का प्रयास न करें तब तक हम वैश्विकता के ढांचे में खुद को नहीं ढाल सकते ।

वहीं अंचल के प्रतिष्ठित साहित्यकार  रवि श्रीवास्तव  ने अध्यक्षता की आसंदी को सुशोभित करते हुए कहा की डाॅ. दानी की अधिकांश कहानियां घटना प्रधान हैं व कहानियों में घटनाएं इतनी तेजी से बदलती हैं कि पाठक की उत्सुकता अंत तक बरकरार रहती है और वह किसी एक कहानी का जब पठन प्रारंभ करता है तो उस कहानी के अंत तक पहुंचे बिना उसका मन नहीं भरता।

कार्यक्रम के वक्ता प्रदेश के जाने माने कथाकार परदेशी राम वर्मा  ने डाॅ. संजय दानी की दो कहानियों का सार बताते हुए कहा कि डाॅ. दानी ने एक तरफ पशु पक्षी को अपना पात्र बनाया है तो दूसरी तरफ वे कविता की महत्ता का गुणगान करते हुए कहते हैं कि कैसे एक अपहरण कर्ता ने अपने द्वारा अपहरित दो व्यक्तियों को इस बिना पर उन्हें बंधन मुक्त कर दिया कि उनमें से एक बंदी एक बेहतरीन कवि है। 

द्वितीय वक्ता “बस्तर बस्तर “जैसे बेहतरीन उपन्यास के लेखक  लोकबाबू ने अपनी समीक्षा में कहा कि डाॅ. दानी की कहानियां पारंपरिक कहानियों की श्रेणी में रखी जा सकती हैं। शब्दों की बाज़ीगरी से वे खुद को दूर रखते हैं व उनकी कहानियां बहुत सरल हैं । जो पाठकों को बांध रखने में पूरी तरह से सक्षम हैं। वे किसी भी प्रकार के वाद से प्रभावित नज़र नहीं आते। कार्यक्रम के केंद्र बिन्दू व कहानीकार डॉ. संजय दानी ने अपने साहित्यिक सफर के बारे में सदन को बताते हुए अपनी दो कहानियों का वाचन किया। स्वागत उद्बोधन की ज़िम्मेदारी शहर के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. ममता दानी ने बखूबी निभाई साथ ही उन्होंने सभी अतिथियों का विस्तृत परिचय भी सदन में रखा।

कार्यक्रम के शेष हिस्से का संचालन शहर के वरिष्ठ शायर ” ईसराइल बेग शाद बिलासपुरी” ने अपने कांधो पे रखा था। उन्होंने भी संचालन के दौरान डाॅ. संजय दानी की कहानियों पर विशेष टिप्पणियां की। इस मौके पर  विनोद साव, गुरबीर सिंह भाटिया, रौनक जमाल, रऊफ कुरैशी, प्रदीप भट्टाचार्य, सुशील यादव, विजय गुप्ता, त्र्यंबक राव साटकर, दशरथ सिंह भुवाल, प्रकाश मंडल, ब्रजेश मलिक, डॉ. ममता दानी, सरिता शर्मा, शुचि भवि, राकेश कुमार गुप्ता, रूसिया, हाजी रियाज खान, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी, हाजी ताहिर निज़ाम, ओमप्रकाश जायसवाल, राजकुमार चौधरी, इकबाल खान तन्हा, इन्द्रजीत दादर निशाचर, आलोक कुमार चंदा, और डा. संजय दानी  के परिवार लोग और साहित्यकार उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रेषण व आभार प्रदर्शन का दायित्व डाॅ. ममता दानी व डाॅ. संजय दानी के सुपुत्र अनुराग दानी ने निभाया व कार्यक्रम की समाप्ति की घोषणा किया।

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