विद्युत अभियंता संघ ने उठाए वैधानिक पात्रता, क्रास-सब्सिडी और सीएसपीडीसीएल की वित्तीय स्थिरता पर सवाल
रायपुर, जिले की रायपुर, धरसीवां, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों से जुड़े क्षेत्र में टाटा पावर कंपनी लिमिटेड को विद्युत वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव का छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल पत्रोपाधि अभियंता संघ ने विरोध कर दिया। संघ ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सचिव को अभ्यावेदन सौंपकर याचिका क्रमांक 89/2026 को वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं करने तथा लाइसेंस प्रदान नहीं करने की मांग की है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इंजीनियर श्रीकांत बड़गैंया ने कहा कि विद्युत वितरण व्यवस्था से जुड़े ऐसे निर्णय में उपभोक्ता हित, सार्वजनिक सेवा और राज्य की दीर्घकालीन विद्युत व्यवस्था की मजबूती को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
संघ ने कहा है कि विद्युत अधिनियम, 2003 के तहत एक क्षेत्र में एक से अधिक वितरण लाइसेंस की संभावना है, लेकिन इसके लिए निर्धारित वैधानिक शर्तों का पूरा होना जरूरी है। संघ ने विशेष रूप से Distribution of Electricity Licence Rules, 2005 में नवंबर 2022 में किए गए संशोधनों का हवाला देते हुए प्रस्तावित क्षेत्र की न्यूनतम क्षेत्र संबंधी पात्रता की जांच करने की मांग की है। संघ का कहना है कि चार तहसीलों को एक क्षेत्र के रूप में प्रस्तावित किया गया है, इसलिए आयोग यह स्पष्ट करे कि यह संशोधित नियमों की शर्तें पूरी करता है या नहीं। यदि इसे छोटा क्षेत्र माना गया है तो इसके लिए Appropriate Government की अधिसूचना भी प्रस्तुत की जानी चाहिए।
सीएसपीडीसीएल के राजस्व पर असर की आशंका
अभियंता संघ ने समानांतर वितरण लाइसेंस से राज्य की सार्वजनिक विद्युत वितरण कंपनी सीएसपीडीसीएल की वित्तीय एवं परिचालन स्थिति प्रभावित होने की आशंका जताई है। संघ के अनुसार प्रस्तावित क्षेत्र में औद्योगिक, वाणिज्यिक और अपेक्षाकृत अधिक राजस्व वाले उपभोक्ता शामिल हैं। ऐसे उपभोक्ताओं का हिस्सा निजी वितरण व्यवस्था में जाने पर सार्वजनिक कंपनी के उपभोक्ता आधार और राजस्व संरचना पर असर पड़ सकता है, जबकि ग्रामीण, दूरस्थ और कम राजस्व वाले क्षेत्रों में आपूर्ति की जिम्मेदारी सीएसपीडीसीएल पर बनी रहेगी। संघ ने इसे ‘क्रीम-स्किमिंग’ की संभावित स्थिति बताते हुए इसका स्वतंत्र परीक्षण कराने की मांग की है। साथ ही क्रॉस-सब्सिडी, व्हीलिंग एवं नेटवर्क शुल्क, शेष उपभोक्ताओं के टैरिफ और ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति पर संभावित प्रभाव का वित्तीय एवं नियामकीय अध्ययन कराने की मांग की है।
सार्वजनिक परिसंपत्तियों के उपयोग पर सवाल
अभ्यावेदन में मौजूदा विद्युत नेटवर्क, उपकेंद्र, फीडर, लाइन, मीटरिंग और संचार व्यवस्था के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संघ ने कहा कि ये परिसंपत्तियां लंबे समय से सार्वजनिक निवेश और उपभोक्ताओं से प्राप्त राजस्व से विकसित हुई हैं। ऐसे में नए लाइसेंसधारी द्वारा इनके उपयोग की स्थिति में स्वामित्व, रखरखाव, नेटवर्क विस्तार, उपयोग शुल्क और संभावित ‘स्ट्रैंडेड एसेट’ की जिम्मेदारी पहले से स्पष्ट की जानी चाहिए। संघ ने समानांतर नेटवर्क बनने से अतिरिक्त पूंजीगत निवेश, भूमि एवं राइट ऑफ वे की जरूरत और तकनीकी समन्वय की जटिलता बढ़ने की आशंका भी जताई है।
कर्मचारियों के हितों का भी उठाया मुद्दा
अभियंता संघ ने कहा कि नई वितरण व्यवस्था का मौजूदा अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, पदोन्नति, मानव संसाधन आवश्यकता और कैडर संरचना पर भी प्रभाव पड़ेगा। इसलिए निर्णय से पहले कर्मचारियों के हितों का भी आकलन किया जाना चाहिए। संघ ने आयोग से सीएसपीडीसीएल की वित्तीय स्थिति, उपभोक्ता एवं राजस्व संरचना, प्रस्तावित कंपनी की पूंजी पर्याप्तता और ऋण क्षमता का विस्तृत परीक्षण कराने तथा सभी हितधारकों को सुनवाई का अवसर देने की मांग की है।
Link : https://shricgnewscreator.com/opposition-to-tata-powers-electricity-distribution-license-demand-for-the-commission-to-dismiss-the-petition/













