डॉक्टर गायब,गर्भवती माताएं बेहाल चरोदा स्वास्थ्य केंद्र की चौपट व्यवस्था ने खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल

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भिलाई, चरोदा स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली अब सीधे लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच के लिए निर्धारित दिन पर महिला डॉक्टर के लगातार तीसरी बार नहीं पहुंचने से घंटों इंतजार करना पड़ा। परेशान गर्भवती माताओं और उनके स्वजनों का आक्रोश आखिरकार अस्पताल स्टाफ और उन्हें जांच के लिए लाने वाली मितानिनों पर फूट पड़ा। हालात ऐसे बने कि जिन महिलाओं को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच और सलाह मिलनी चाहिए थी, उन्हें दूसरे स्वास्थ्य केंद्रों के चक्कर लगाने पड़े।

हर माह 9 और 24 तारीख को गर्भवती माताओं की विशेष जांच की जाती है। सोमवार को सुबह 10 बजे से ही आसपास के क्षेत्रों से महिलाएं मितानिनों के साथ चरोदा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगी थीं। विभाग की ओर से इन दिनों के लिए हथखोज स्वास्थ्य केंद्र की महिला डॉक्टर डॉ. ज्योति देवांगन की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन दोपहर तक उनके नहीं पहुंचने से मरीज इंतजार करते रहे। कर्मचारियों की ओर से डॉक्टर के जल्द आने का आश्वासन दिया जाता रहा, मगर समय बीतता गया और जांच शुरू नहीं हो सकी।

आखिरकार केंद्र में मौजूद डेंटिस्ट और फिजियोथेरेपिस्ट ने सामान्य जांच में सहयोग किया। हालांकि प्रसव की संभावित तारीख नजदीक होने अथवा किसी विशेष परेशानी से जूझ रहीं महिलाओं के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच जरूरी थी। ऐसी महिलाओं को मजबूर होकर भिलाई-3 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ा। वहां भी मरीजों की लंबी कतार मिली। दोपहर तक भिलाई-3 केंद्र में 168 ओपीडी पर्चियां कट चुकी थीं, जिनमें 58 गर्भवती महिलाओं की थीं।

भिलाई-3 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

पहले भी हो चुका है हंगामा, फिर भी नहीं सुधरी व्यवस्था

चरोदा केंद्र में यह पहली घटना नहीं है। 24 मार्च को भी गर्भवती महिलाओं की जांच के दिन महिला डॉक्टर के अनुपस्थित रहने पर हंगामा हुआ था। तत्कालीन प्रभारी डॉ. कीर्ति तिर्की को विभाग ने नोटिस जारी किया था। बताया जाता है कि इसके बाद से वे अस्पताल नहीं आईं और कई नोटिस के बावजूद जवाब नहीं मिला।

इसके बाद गर्भवती महिलाओं की जांच के लिए हथखोज से डॉ. ज्योति देवांगन की ड्यूटी लगाई गई, लेकिन आरोप है कि वह भी करीब तीन माह से चरोदा नहीं पहुंच रही हैं। सवाल यह है कि जब जिम्मेदार डॉक्टर लगातार अनुपस्थित हैं तो स्वास्थ्य विभाग वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं कर पा रहा?

सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी लापरवाही को महज प्रशासनिक चूक नहीं कहा जा सकता। गर्भवती महिलाओं की जांच में देरी उनके और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बन सकती है। लोगों का आरोप है कि विभागीय निगरानी और जवाबदेही का पूरा तंत्र ही सुस्त पड़ा है। यदि समय पर व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो किसी गंभीर स्थिति की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

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