अशरफी मस्जिद, रूआबांधा बस्ती में हुई बैठक में शामिल हुए दुर्ग-भिलाई की तमाम मस्जिदों के इमाम और आलिम
भिलाई, भिलाई-दुर्ग व आसपास की तमाम मस्जिदों के इमामों और आलिमो की एक अहम बैठक रविवार 21 जून को अशरफी मस्जिद, रूआबांधा बस्ती में रखी गई। अशरफी मस्जिद व मदरसा के सदर सैयद अली के संयोजन में हुई इस बैठक में 10 मुहर्रम (यौमे आशूरा) के जुलूस के दौरान डीजे, शोर-शराबा, बेपर्दगी और दूसरी गलत रस्मों को रोकने के लिए एक कार्य योजना (रोडमैप) तैयार करने पर चर्चा की गई।
बैठक में मौजूद आलिमों ने फिक्र जाहिर करते हुए कहा कि डीजे और अत्यधिक तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम केवल ध्वनि प्रदूषण ही नहीं फैलाते, बल्कि लोगों की सेहत, शिक्षा, सामाजिक व्यवस्था और सार्वजनिक शांति के लिए भी गंभीर खतरा बनते हैं।
बैठक में शामिल उलेमा, हुफ्फाज़ और इमामों ने इस बात पर जोर दिया कि मुहर्रम जैसे पाक महीने में अमन, संजीदगी और दीन की सही समझ को बढ़ावा दिया जाए। सभी ने मांग की कि शादी, मजहबी जुलूस और दूसरे तमाम सामाजिक आयोजनों में डीजे और बेहद तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के उपयोग को पूरी तरह बंद किया जाए, ताकि समाज में अमन और भाईचारा कायम रहे। बैठक के आखिर में आलिमों ने प्रशासन से डीजे और अनावश्यक शोर-शराबे के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

करबला की याद ताज़ा करने का एक जरिया है ताजिया बैठक में आलिमों ने यह भी साफ किया कि ताजिया यानी हुबहू रौज़ा-ए-हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की नकल बनाकर बरकत की नीयत से रखना अपने आप में प्रतिबंधित नहीं है, बल्कि यह हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु और वाक़िया-ए-कर्बला की याद ताज़ा करने का एक जरिया है। लेकिन ताजिया बनाकर उसे मिट्टी में दबा देना या पानी में बहा देना माल की बर्बादी और बेअदबी है। इसलिए ताजिए के नाम पर होने वाली गलत रस्में, गैर-शरई काम, शोर-शराबा, ढोल-ताशे, महिला-पुरुषों का गैरजरूरी मेल, बेपर्दगी और दूसरे गैर मुनासिब अमल किसी भी हाल में मंजूर नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के असल पैगाम पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इमाम हुसैन से सच्ची मुहब्बत है खिदमते खल्क। आलिमों ने कहा कि अगर हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से सच्ची मोहब्बत का इज़हार करना है तो इसका सबसे अच्छा तरीका खिदमते खल्क (मानव सेवा) है। उनके नाम पर जरूरतमंदों-मरीजों की मदद की जाए और गरीब बेटियों के शादियों में सहयोग किया जाए। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मुहर्रम के जुलूस अमन, अनुशासन और आपसी सम्मान के साथ निकाले जाएं। जुलूस के दौरान या उसके बाद फैलने वाली गंदगी की सफाई का खास इंतजाम किया जाए, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश जाए कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के मानने वाले केवल दावे नहीं करते, बल्कि खिदमत, तालीम और सफाई में भी मिसाल पेश करते हैं।

बैठक में मौजूद थे। इस अहम बैठक में मुफ्ती जलालुद्दीन रज़वी-हाउसिंग बोर्ड, मौलाना इकबाल अंजुम अशरफ़ी–सेक्टर 6, मुफ्ती कलीम अशरफ़ रज़वी कैंप 2, मुफ्ती जामी क़मर अज़हरी–ज़ोन 3, मुफ्ती सलीम रज़ा–इमाम जामा मस्जिद, दुर्ग, मौलाना अमीर अहमद क़ादरी– फ़रीदिया मस्जिद, मुफ्ती मुहम्मद शाहिद अली मिस्बाही–रुआबांधा, मौलाना शहाबुद्दीन अशरफ़ी–दुर्ग, मुफ्ती माशाअल्लाह–मक्का मस्जिद, फ़रीद नगर, मुफ्ती फ़ैज़ान रज़ा मिस्बाही–बोरसी, क़ारी सनाउल्लाह रज़वी–रिसाली, क़ारी उमर फारूक अशरफ़ी–रुआबांधा, क़ारी अब्दुल क़य्यूम–खुर्सीपार 3, हाफ़िज़ क़ासिम–रायपुर नाका, दुर्ग, हाफ़िज़ इसराफिल–हुडको मस्जिद, क़ारी इरफ़ान–मदरसा अशरफ़िया, हाफ़िज़ मुहम्मद शमशीर अली अशरफ़ी–रुआबांधा, हाफ़िज़ जमील रज़ा–मरौदा, हाफ़िज़ ज़ीशान रज़ा–मरौदा, हाफ़िज़ ज़ुहूर अशरफ़ी–मरौदा, हाफ़िज़ शहादत अशरफ़ी–मरौदा, हाफ़िज़ ग़ुलाम रज़ा–नूरी मस्जिद, फ़रीद नगर, हाफ़िज़ मज़हर अली–बोरसी, मौलाना मक़सूद–कैंप 1, क़ारी जमील–कैंप 1, हाफ़िज़ मक़सूद रज़ा–सेक्टर 8,हाफ़िज़ शमशीर–केलाबाड़ी, हाफ़िज़ रफ़ीउल्लाह–जामुल, हाफ़िज़ शराफ़त–नूरी मस्जिद, फ़रीद नगर, मौलाना इलियास मिस्बाही–अशरफ़िया, दुर्ग, मौलवी इकरामुद्दीन अशरफ़ी–रुआबांधा, हाफ़िज़ अब्दुल करीम–फ़रीद नगर, मुहम्मद रफ़ीक़–कैंप 2, हाफ़िज़ अकबर, हाफ़िज़ तारिक़–भिलाई, हाफ़िज़ असरार–ज़ोन 1,हाफ़िज़ नसीम–ज़ोन 3, हाफ़िज़ क़ुरबान– रायपुर नाका, हाफ़िज़ नसीम–भिलाई 3, हाफ़िज़ एहसान–अशरफ़िया, दुर्ग, हाफ़िज़ इस्माईल–कुरुद, हाफ़िज़ मुहम्मद आसिफ–कुरुद, हाफ़िज़ नोमान रज़ा और मदरसा ताजुल उलूम रुआबांधा भिलाई के मैनेजर सैयद अफ़ताबुर्रब सहित दीगर हज़रात शामिल हुए।






