दुर्ग, आईआईटी भिलाई के रसायन विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं के प्रयास को एचपीसीएल एनजीआईसी (नेक्स्ट जेनरेशन आइडिएशन कॉन्टेस्ट) 2025 में “सराहनीय विचार पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। इस टीम में भानेंद्र साहू, सुब्रत दोलुई, स्वरूप माईती, देबाशीष दास, के. सी. गुरजाला और संजीब बैनर्जी शामिल हैं। पुरस्कार वितरण समारोह 30 मार्च 2026 को बेंगलुरु में एचपीसीएल ग्रीन अनुसंधान एवं विकास केंद्र द्वारा आयोजित किया गया।
एचपीसीएल एनजीआईसी भारत के प्रमुख नवाचार मंचों में से एक है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा, पर्यावरण और सततता से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के समाधान हेतु उन्नत विचारों को पहचानना और प्रोत्साहित करना है। यह मंच शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और नवप्रवर्तकों को जोड़कर वैज्ञानिक विचारों को वास्तविक और प्रभावी समाधानों में बदलने का अवसर प्रदान करता है।
पुरस्कार टीम के शोध कार्य “वेस्ट-टू-वेल्थ: तेल रिसाव सुधार हेतु छिद्रयुक्त पॉलीसल्फाइड अवशोषक का उपयोग” के लिए प्रदान किया गया। यह शोध “सततता और परिपत्र अर्थव्यवस्था” विषय के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया था। स्वरूप माईती ने कार्यक्रम में टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए शोध कार्य प्रस्तुत किया और पुरस्कार स्वीकार किया।
यह शोध अपशिष्ट संसाधनों से विकसित उन्नत बहुलकीय (पॉलीमेरिक) सामग्रियों पर केंद्रित है, जो तेल रिसाव को नियंत्रित करने में प्रभावी हैं और पर्यावरणीय सततता एवं परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हैं। इस तकनीक पर दो वैज्ञानिक प्रकाशन हो चुके हैं और भारतीय पेटेंट भी प्राप्त हुआ है।
एचपीसीएल एनजीआईसी 2025 में यह मान्यता शोध की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, नवाचार क्षमता और वास्तविक जीवन में इसके प्रभावी अनुप्रयोग को दर्शाती है। यह पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान की दिशा में आईआईटी भिलाई की एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक उपलब्धि मानी जा रही है।


