मितानिनों व स्वास्थ्य अमले को मिला प्रशिक्षण, निशुल्क जांच व उपचार की जानकारी दी
भिलाई, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भिलाई-3 एवं शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम चरोदा के अंतर्गत विश्व क्षय दिवस के अवसर पर जनजागरूकता के लिए व्यापक अभियान चलाया गया। इस दौरान मितानिनों और स्वास्थ्य विभाग के अमले ने जागरूकता रैली निकालकर लोगों को टीबी के प्रति सचेत किया। साथ ही “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” कार्यक्रम आयोजित कर प्रत्येक वार्ड को टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान मितानिनों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीबी मुक्त भारत अभियान के द्वितीय चरण “निक्षय निरामय” कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में टीबी की पहचान, रोकथाम और उपचार की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी गई।
बीईटीओ सैय्यद असलम ने बताया कि टीबी एक संक्रामक रोग है, जो विशेष रूप से कम प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में रहने वालों तथा बीड़ी-सिगरेट का सेवन करने वालों में अधिक फैलता है। उन्होंने इसके प्रमुख लक्षणों में लगातार खांसी, हल्का बुखार, बलगम में खून आना, वजन कम होना और भूख न लगना शामिल बताए।

मेडिकल ऑफिसर डॉ. शिखर अग्रवाल ने मितानिन समूह को घर-घर सर्वे कर प्रारंभिक स्तर पर टीबी मरीजों की स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए और इसके लिए आवश्यक तकनीकी जानकारी भी साझा की।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भुवनेश्वर कुमार कठौतिया एवं जिला क्षय अधिकारी डॉ. अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि टीबी के प्रति लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि समय पर जांच और पूर्ण उपचार से यह रोग पूरी तरह ठीक हो सकता है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज दानी ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और उपचार निशुल्क उपलब्ध है। लक्षण दिखाई देने पर तुरंत बलगम जांच एवं एक्स-रे कराना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि शासन द्वारा टीबी मरीजों को बेहतर पोषण के लिए प्रति वर्ष 6000 रुपये की सहायता राशि दी जाती है। साथ ही कोई भी नागरिक टीबी मरीज को गोद लेकर “निक्षय मित्र” बन सकता है और छह माह तक पोषण आहार उपलब्ध करा सकता है।
कार्यक्रम में एलएचवी आर. विश्वास, राहुल यादव, टीबी यादव, मितानिन समन्वयक शमीम बानो, प्रेरक प्रतिमा वर्मा सहित बड़ी संख्या में मितानिन एवं स्वास्थ्य विभाग का अमला उपस्थित रहा।


