रायपुर, केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सोमवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर पंडुम 2026 के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक बस्तर नक्सल हिंसा, बंदूकों की गोलियों और आईईडी विस्फोटों के कारण भय का पर्याय बना हुआ था, लेकिन आज वही बस्तर अपनी समृद्ध संस्कृति, कला और परंपराओं के कारण देश-दुनिया में पहचान बना रहा है। बस्तर पंडुम में 12 विधाओं—खानपान, नृत्य, गीत, वेशभूषा, नाटक, परंपरा और वन औषधि—में 55 हजार से अधिक आदिवासियों की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि बस्तर अब नक्सल भय से मुक्त हो रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम ने यहां की सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित किया है और यह केवल बस्तर ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि बस्तर की संस्कृति देश और दुनिया के सामने पहुंचे और आदिवासी कला को वैश्विक सम्मान मिले। इसी सोच के तहत बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस और उनकी 150वीं जयंती को जनजातीय गौरव वर्ष घोषित किया गया।
अमित शाह ने नक्सलियों से आत्मसमर्पण की अपील करते हुए कहा कि जो हथियार छोड़ेंगे, सरकार उनका सम्मानपूर्वक पुनर्वसन करेगी, लेकिन जो हथियार उठाएंगे, उन्हें उसी भाषा में जवाब मिलेगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई का मूल उद्देश्य आदिवासी किसानों, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा है।
उन्होंने बताया कि बस्तर में 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा। अगले पांच वर्षों में बस्तर को आदिवासी क्षेत्रों में सबसे विकसित क्षेत्र बनाया जाएगा। नई पर्यटन गतिविधियां, सड़क, रेल, स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई परियोजनाएं बस्तर के विकास को नई गति देंगी।
गृह मंत्री ने कहा कि आज बस्तर में रात के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम हो रहे हैं, जो यहां आए सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास जताया कि तय समय सीमा में बस्तर पूरी तरह नक्सल मुक्त होगा।


