मानवीय सहयोग की मिसाल बने प्रधान आरक्षक इंद्रजीत कुमार, जरूरतमंदों को बांटे स्टील के बर्तन

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भिलाई। समाज में आज भी ऐसे लोग हैं जो अपने कर्तव्य से बढ़कर मानवीय जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यातायात पुलिस के प्रधान आरक्षक इंद्रजीत कुमार आग्नेकर (1260) ऐसे ही एक संवेदनशील और सेवा-भाव से परिपूर्ण व्यक्तित्व हैं, जो निरंतर जरूरतमंदों के सहयोग के लिए तत्पर रहते हैं।
इसी कड़ी में उन्होंने सड़क किनारे जीवन यापन करने वाले गरीब व जरूरतमंद लोगों को भोजन के उपयोग हेतु स्टील के बर्तन भेंट किए। खास तौर पर भिक्षावृत्ति कर गुजर-बसर करने वाले लोगों को यह बर्तन दिए गए, ताकि वे सम्मानपूर्वक भोजन कर सकें। यह पहल न केवल भौतिक सहायता थी, बल्कि मानवता और आत्मसम्मान को बनाए रखने की एक सशक्त कोशिश भी रही।

उल्लेखनीय है कि प्रधान आरक्षक इंद्रजीत कुमार अपनी ड्यूटी के दौरान भी मानवीय कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते हैं। वे आए दिन सड़क पार करने में असमर्थ बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों की मदद करते नजर आते हैं। उनकी सतर्कता और संवेदनशीलता कई लोगों के लिए सहारा बनती है।

ड्यूटी के बाद भी उनका सेवा भाव समाप्त नहीं होता। जनसहयोग की भावना से प्रेरित होकर वे समय-समय पर जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराते हैं। बीते दिनों जब कड़ाके की ठंड ने जनजीवन को प्रभावित किया था, तब उन्होंने गरीबों को कंबल और गर्म कपड़े वितरित कर ठंड से राहत दिलाने का सराहनीय कार्य किया था।
प्रधान आरक्षक इंद्रजीत कुमार की यह निरंतर सेवा भावना समाज में सकारात्मक संदेश देती है कि वर्दी केवल कानून का प्रतीक नहीं, बल्कि करुणा, सहयोग और मानवता की पहचान भी हो सकती है। उनका यह प्रयास निश्चित रूप से अन्य लोगों को भी जरूरतमंदों की मदद के लिए प्रेरित करेगा।

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