साहित्यिक मंच पर भावनाओं, राष्ट्रभक्ति और भक्ति रस का अद्भुत संगम
भिलाई, प्रवाह परिवार के साहित्यिक मंच पर आयोजित काव्य महाकुंभ ने रचनात्मक अभिव्यक्ति को एक सशक्त स्वर प्रदान किया। यह आयोजन केवल काव्य पाठ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन भावनाओं का उत्सव बना, जो अब तक रचनाकारों की डायरी के पन्नों में सिमटी हुई थीं।
माँ शारदे के वंदन से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ रामदेव द्वारा माँ शारदे की वंदना से हुआ। इसके पश्चात संपूर्ण कार्यक्रम का सफल, सधा हुआ एवं गरिमामयी संचालन आरफ़ा साएमीन (बोकारो स्टील सिटी, झारखंड) ने किया।
संचालन के साथ विचारोत्तेजक प्रस्तुतियाँ
आरफ़ा साएमीन ने संचालन के साथ-साथ “वालिद का पैग़ाम: पैसा और ज़िंदगी की हक़ीक़त” विषय पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसने जीवन मूल्यों पर गहरी छाप छोड़ी। वहीं भाई की निकाह पर आधारित ग़ज़ल “सेहरा — जो बातें दिल से निकलीं” ने श्रोताओं को भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।
काव्य पाठ में विविध रसों की झलक
काव्य क्रम में राबिया ने बचपन और जीवन अनुभवों को सजीव शब्द दिए।
सर्वजीत की देशभक्ति रचना “मेरा देश महान” ने राष्ट्रभाव जाग्रत किया।
भंवरलाल प्रेमी ने गंभीर भावों से परिपूर्ण कविता प्रस्तुत की।
कृष्णा ने दादाजी पर आधारित कविता से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
पर्व, राष्ट्र और समाज पर केंद्रित रचनाएँ
हेमा ने मकर संक्रांति और बसंत पंचमी पर आधारित रचना प्रस्तुत की।
शशि जोशी ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति कविता सुनाई।
राजेश की कविता ने सत्ता और मौन पर प्रहार करते हुए सामाजिक चेतना को स्वर दिया।
भक्ति रस से आध्यात्मिक हुआ वातावरण
इंदु द्वारा प्रस्तुत श्रीकृष्ण भजन तथा मीना के भक्ति गीत ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सर्वजीत की एक अन्य रचना “उनका जीना भी क्या जीना है” ने जीवन के गूढ़ प्रश्नों पर श्रोताओं को सोचने पर विवश किया।

संस्थापक हिमांशु पाठक का संदेश
इस अवसर पर प्रवाह परिवार के संस्थापक हिमांशु पाठक ने कहा कि ऐसे आयोजन नवोदित एवं अनुभवी रचनाकारों को अपनी साहित्यिक अभिव्यक्ति साझा करने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा, “साहित्य समाज की आत्मा है और प्रवाह परिवार इसे निरंतर प्रवाहित रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”
नवोदित रचनाकारों से जुड़ने का आह्वान
उन्होंने नवांकुर कवियों एवं साहित्य प्रेमियों से आह्वान किया कि जो भी रचनाकार अपने सपनों, बचपन और भावनाओं को पुनः शब्द देना चाहता है, वह प्रवाह परिवार से संपर्क कर सकता है।
अनकहे शब्दों को मिला मंच
प्रवाह परिवार का यह काव्य महाकुंभ न केवल एक साहित्यिक आयोजन रहा, बल्कि उन अनकहे शब्दों को आवाज़ देने का मंच बना, जो अब तक केवल डायरी के पन्नों तक सीमित थे।


