दुर्ग में काव्य-रस की गूँज: संगवारी छत्तीसगढ़ चैनल व क्रियेटिव आर्ट्स एकादमी द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन

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छेड़छेड़ा पर्व पर काव्य रस की अविरल धारा, प्रेम सागर चौक में सजी भव्य काव्य गोष्ठी

नव वर्ष 2026 के स्वागत में 15 कवियों ने गीत, ग़ज़ल और विविध रसों से श्रोताओं को किया भावविभोर

दुर्ग, संगवारी छत्तीसगढ़ चैनल एवं क्रियेटिव आर्ट्स एकादमी के संयुक्त तत्वावधान में प्रेम सागर चौक, बैगापारा (दुर्ग) में नव वर्ष 2026 के स्वागत एवं वर्ष के प्रथम पर्व छेड़छेड़ा के उपलक्ष्य में भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन डॉ. अवनीश चंद्र श्रीवास्तव एवं उत्कर्ष श्रीवास्तव के माध्यम से किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथि कवियों के तिलक व श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत से हुई। काव्य गोष्ठी का सफल संचालन नवेद रज़ा दुर्गवी ने किया, जिन्होंने आरंभ से अंत तक श्रोताओं को कविता की शमा से बांधे रखा। उनके संचालन की सभी साहित्य प्रेमियों ने मुक्त कंठ से सराहना की।

इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विजय गुप्ता ने की, जिन्होंने अत्यंत गरिमामय ढंग से दायित्व निभाया। गोष्ठी में कुल 15 कवियों ने गीत, ग़ज़ल, हजल, शृंगार रस, वीर रस सहित विविध काव्य रसों की प्रस्तुति दी। कविताओं के माध्यम से गंगा-जमुनी तहज़ीब, प्रेम, सौहार्द और देश में सुख-शांति की कामना की गई।

कार्यक्रम में शामिल कवियों में डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीक़ी, राजकुमार चौधरी, सुरेश कुमार बंछोर, डॉ. कल्याण सेन साहू, रियाज़ खान गौहर, सूर्य कुमार गुप्ता, फरीदा शाहीन अंसारी, डॉ. विजय गुप्ता, नवेद रज़ा दुर्गवी, सुमीत कुमार, डॉ. नरेंद्र देवागन, मिताली वर्मा श्रीवास्तव, विश्वनाथ, सोनिया सोनी एवं विशाल कुमार सोनी शामिल रहे। अन्य कविगण व बड़ी संख्या में उपस्थित दर्शकों ने कार्यक्रम का भरपूर आनंद लिया।

अंतिम चरण में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए डॉ. विजय गुप्ता ने समयानुकूल सीख लेने और साहित्य के माध्यम से समाज को दिशा देने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर उन्होंने डॉ. अवनीश श्रीवास्तव को अपनी लिखित पुस्तक भेंट की। वहीं राजकुमार चौधरी ने सूर्य कुमार गुप्ता को अपना छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल संग्रह भेंट किया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजक डॉ. अवनीश श्रीवास्तव एवं उत्कर्ष श्रीवास्तव ने आभार व्यक्त करते हुए घोषणा की कि अगला आयोजन पूर्णतः हास्य रस से सराबोर होगा। साथ ही संचालक नवेद रज़ा दुर्गवी से आगामी कवि सम्मेलन हेतु हास्य कवियों के चयन का आग्रह किया गया।

देर रात तक चली इस काव्य गोष्ठी में श्रोताओं का मन कविता से तृप्त नहीं हुआ, लेकिन कार्यक्रम ने सभी के मन को प्रसन्नता और साहित्यिक आनंद से भर दिया।

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